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Faridabad News: बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद समस्याओं का नहीं हुआ समाधान

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय के सभागार कक्ष में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर में नागरिकों की समस्याएं सुनी गईं। उपायुक्त आयुष सिन्हा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर की अध्यक्षता एडीसी अंजलि श्रोत्रिया ने की।



शिविर में कुल 20 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें सबसे अधिक नौ शिकायतें सीआरआईडी विभाग से संबंधित रहीं। ये शिकायतें मुख्य रूप से परिवार पहचान पत्र में आय संबंधी त्रुटियों, नए सदस्य जोड़ने और अन्य अपडेट से जुड़ी थीं। इसके अलावा नगर निगम, पुलिस, राजस्व, बिजली, खाद्य एवं आपूर्ति, उद्योग एवं वाणिज्य तथा अन्य विभागों से भी शिकायतें सामने आई। एडीसी ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए, ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके। उधर, कई लोगों की शिकायत रही कि बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद समाधान नहीं हो रहा।
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पीएफ भुगतान न मिलने की शिकायत


समाधान शिविर में पर्वतीय कॉलोनी निवासी सूरजमल ने बताया कि उन्हें पीएफ का पैसा नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि लॉकडाउन के दौरान 25 से 26 महीनों तक हर महीने लगभग 2000 रुपये पीएफ के रूप में काटे गए थे, लेकिन अभी तक उसका भुगतान नहीं हुआ है। 70 वर्ष से अधिक आयु होने के बावजूद वह लंबे समय से समाधान शिविरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।





फैमिली आईडी में गलत आय दर्ज


डबुआ कॉलोनी से आए मनोज ने बताया कि उनकी फैमिली आईडी में बेटे यश की आय एक लाख 40 हजार रुपये दर्ज कर दी गई है, जबकि यश ने इसी साल 12वीं पास की है। इस गलत प्रविष्टि के चलते छात्रवृत्ति और ईडब्लूएस जैसी योजनाओं के लाभ पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह पिछले एक महीने से समाधान शिविर के चक्कर लगा रहे हैं और अब तक 10 से 12 बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।



पते में सुधार की मांग


सेक्टर तीन निवासी अनुज ने बताया कि वह अपने पते में सुधार कराने आए थे, लेकिन उन्हें बार-बार इंतजार करने के लिए कहा गया। सुनवाई के बाद कहा गया कि अगर समाधान न हुआ हो तो अगली बार दुबारा आए।
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फैमिली आईडी में गलत आय दर्ज होने का मामला


चांदपुर निवासी सुरेश सिंह ने बताया कि उनकी फैमिली आईडी में आय तीन से पांच लाख रुपये तक दर्ज कर दी गई है, जबकि वह मजदूरी करते हैं और उनकी वास्तविक आय 80 हजार रुपये से भी कम है। उन्होंने कहा कि वह समाधान शिविर में 10 से 12 बार आ चुके हैं और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी सुनवाई नहीं हुई। हमेशा उन्हें एक कमरे से दूसरे कमरे में भेजा जाता है।
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