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Faridabad News: जिले में अच्छी बारिश के बाद भी गिरता जा रहा भू-जल स्तर

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सीजीडब्ल्यूबी रिपोर्ट के अनुसार 10 से 20 व कुछ इलाकों में 20 से 40 मीटर तक नीचे पहुंच चुका है भू-जल स्तर
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निगम व एफएमडीए के साथ एचएसवीपी लोगों को जागरूक करने के साथ जलस्तर बढ़ाने के कर रहा है प्रयास
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी में एक तरफ तेजी से सुविधाएं व शहरीकरण बढ़ रहा है वहीं दूसरी तरफ जिले में भू-जल स्तर तेजी से कम हो रहा है। केंद्रीय भू-जल बोर्ड द्वारा जारी प्री-मानसून की भूजल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद में पानी की उपलब्धता को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिले के अधिकांश हिस्सों में भू-जल स्तर 10 से 20 मीटर तथा कई क्षेत्रों में 20 से 40 मीटर तक नीचे दर्ज किया गया है। जहां एक तरफ निगम के साथ एफएमडीए व एचएसवीपी भू-जल को स्तर को ठीक करने के लिए कई बड़ कदम उठा रहे हैं वहीं बढ़ती आबादी के कारण भू-जल स्तर पर दवाब बढ़ता जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्री-मानसून अवधि में भू-जल स्तर का आकलन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस समय पिछले मानसून का प्रभाव समाप्त हो चुका होता है और नया मानसून अभी शुरू नहीं हुआ होता। इस स्तर पर दर्ज पानी की गहराई पूरे वर्ष की जल स्थिति का संकेत देती है। फरीदाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी और औद्योगिक जिले में भू-जल स्तर पहले से काफी कम हुआ है।
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निगरानी कुओं से मिल रही सटीक जानकारी
सीजीडब्ल्यूबी द्वारा हरियाणा में कुल 495 भू-जल निगरानी कुओं के माध्यम से यह अध्ययन किया गया है। इनमें फरीदाबाद जिले में 12 पायजोमीटर शामिल हैं। पायजोमीटर ऐसे वैज्ञानिक उपकरण होते हैं जो जमीन के भीतर विभिन्न गहराइयों पर जल स्तर और दबाव को सटीक रूप से मापते हैं। फरीदाबाद में खुले डगवेल न होने के कारण पूरा आकलन इन्हीं आधुनिक उपकरणों से किया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि जिले में भू-जल की स्थिति को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
दो साल में गिरावट ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में मई 2023 से मई 2025 के बीच जल स्तर में आए बदलाव का विश्लेषण भी किया गया है। इस दौरान फरीदाबाद जिले के कुछ क्षेत्रों में चार मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह गिरावट पूरे जिले में समान नहीं है और इसे आइसोलेटेड पैचेज यानी सीमित इलाकों तक बताया गया है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह भविष्य के लिए चेतावनी संकेत है। लगातार दो वर्षों तक गिरावट यह दर्शाती है कि भू-जल की निकासी रिचार्ज की तुलना में अधिक बनी हुई है।

बारिश के बावजूद नहीं हो रहा भू-जल रिचार्ज
रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद में औसतन लगभग 521 मिलीमीटर वार्षिक वर्षा होती है, जो भू-जल रिचार्ज के लिए पर्याप्त मानी जाती है। इसके बावजूद जल स्तर में कोई खास सुधार नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका मुख्य कारण यह है कि बारिश का बड़ा हिस्सा जमीन के अंदर जाने के बजाय नालों व सीवर में बह जाता है।

शहरीकरण के कारण हो रही समस्या
तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट की सड़कों और इमारतों के विस्तार के साथ प्राकृतिक जल संरचनाओं का कम होना रिचार्ज की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। इसी के कारण बारिश होने के बाद भी भू-जल भंडार तक पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है।

शहरी विकास और बढ़ती मांग का असर
फरीदाबाद एनसीआर का प्रमुख औद्योगिक और आवासीय केंद्र है। बढ़ती आबादी के साथ यहां पर तेजी से उद्योग भी बढ़ रहे हैं दोनों की जरूरत को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में जल की जरूरत होती है। इसी के चलते कई स्थानों पर भू-जल पर अधिक दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट के आकंड़ों की माने तो अगर जल उपयोग का संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले वर्षों में जल संकट की स्थिति और गहरी हो सकती है।
संरक्षण उपायों पर जोर देने की जरूरत
सीजीडब्ल्यूबी की रिपोर्ट में भू-जल संरक्षण के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। इनमें वर्षा जल संचयन, कृत्रिम रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण, नहर के पानी का अधिक उपयोग, अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग और जल के विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन उपायों को वैज्ञानिक तरीके से लागू कर भू-जल स्तर को स्थिर किया जा सकता है।

लोगों को भी करना होगा सहयोग

एक तरफ नगर निगम के साथ एमएमडीए व एचएसवीपी की तरफ से जल संरक्षण को लेकर कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जब तक लोगों की तरफ से जागरूकता दिखाते हुए पानी का इस्तेमाल सही तरीके से नहीं किया जाएगा तब तक भू-जल स्तर को तेजी से बढ़ाना मुश्किल है। लोगों को भी अपने बड़े घरों या प्लाटों में भू-जल रिचार्ज के लिए वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने के साथ पानी का इस्तेमाल सोच समझकर करना होगा।

नए कमिश्नर आने के बाद बड़े स्तर पर किया जा रहा काम
नगर निगम में कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा के आने के बाद निगम की तरफ से बड़े स्तर पर भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। मिर्जापुर व सेक्टर 77 में दो बड़े एसटीपी काम कर रहे हैं इनके साथ ही दो नए एसटीपी भी चालू करने किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार फरीदाबाद में जितना पानी इस्तेमाल किया जा रहा है उसका आधे से ज्यादा रिसाइकल करके दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है वहीं निगम कमिश्नर की योजना है कि आने वाले दिनों में 100 प्रतिशत पानी को रिसाइकल करके दोबारा इस्तेमाल में लिया जाए। वहीं इसके लिए कई करोड़ों की परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
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शहरीकरण में भू-जल स्तर को दोबारा बढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक अशोक कुमार देशवाल का कहना है कि शहरीकरण में भू-जल स्तर को दोबारा बढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण हैं इसके लिए कई स्तरों पर काम करना होगा। सबसे पहले खेती वाले स्थानों पर कम पानी वाली फसलों को ही लगाना चाहिए । उदाहरण के लिए धान के स्थान पर दाल या मक्का की खेती कर सकते हैं वहीं पौधरोपण की रफ्तार भी तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। वहीं फसलों के छोटी नहरों का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि एसटीपी का पानी इस्तेमाल किया जा सके। इसके साथ वाटर रिचार्ज ज्यादा करने के लिए अधिक से अधिक तालाब बनाए जाने चाहिए इसके लिए सरकार भी अनुदान देती है लोग मछली पालन के लिए भी तालाब बना सकते हैं। इससे रोजगार भी मिलेगा। वहीं एसटीपी की संख्या बढ़ाने के साथ बारिश का जल संरक्षण करने के लिए हर बड़े भवन में प्लांट लगाया जाना चाहिए।
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