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Faridabad News: 5500 करोड़ की ईडीसी वसूलने के बावजूद ग्रेटर फरीदाबाद में सीवर, पानी की समस्या बरकरार

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धनंजय चौहान
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फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद में विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त टाउनशिप का निर्माण कराने के साथ मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रशासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। पिछले 15 साल में एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) के रूप में लोगों से करीब 5,500 करोड़ रुपये वसूलने के बावजूद लोग सीवर, पानी और बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं। यह मुद्दा हाल ही उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी उठा है। यहां के बाशिंदे खुद को सरकार, प्रशासन की लाल फीताशाही और बिल्डरों की मनमानी से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ग्रेटर फरीदाबाद का मास्टर प्लान 2004 में लागू किया गया था। परियोजना के अनुसार 10 वर्ष में यहां नया शहर बस जाना चाहिए था। एचएसवीपी की ओर से वर्ष 2015 में विकास परियोजनाएं शुरू की गईं। इस बीच प्राधिकरण की ओर से ग्रेटर फरीदाबाद में विकास परियोजनाओं के नाम पर करीब 5500 करोड़ रुपये वसूल लिए गए, लेकिन वर्षों बाद भी लोग मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रेफा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद मनोचा ने बताया कि ईडीसी के रूप में वसूले गए रुपयों से क्षेत्र में बिजली, पानी, सीवर, फायर स्टेशन, बिजली सबस्टेशन, स्टॉर्म वाटर लाइन, सीवर शोधन संयंत्र, सड़कों को बनाना था। 10 से 15 साल बीतने के बावजूद कई सेक्टरों में सीवर लाइन डालने का काम अधूरा है। सभी सोसाइटियों में समुचित रूप से रेनीवेल का पानी नहीं पहुंच रहा है। आज भी अनेक सोसाइटियों में ट्यूबवेल का पानी सप्लाई किया जा रहा है।
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बिजली व्यवस्था का बुरा हाल
ग्रेटर फरीदाबाद में बेहतर बिजली व्यवस्था के लिए करीब तीन सबस्टेशन बनने थे। इनमें से केवल एक बना है। वह भी अभी चालू नहीं हुआ है। इस कारण ग्रेटर फरीदाबाद में दूरदराज के सब स्टेशनों से बिजली आपूर्ति की जा रही है। ओवरलोडिंग के कारण लोगों को आए दिन भारी बिजली कटौती से जूझना पड़ता है। हालत यह है कि एक बार फाल्ट से कटौती पर लोगों को दो-दो दिन सप्लाई बहाल होने इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ने ईडीसी का यह पैसा विकास कार्यों पर खर्च न करके ब्याज पर देकर दोगुना कर लिया, जबकि समस्याएं आज भी बरकरार हैं। ग्रेटर फरीदाबाद में सुरक्षा व्यवस्था भी बड़ी समस्या है। हालांकि सेक्टर में विकास परियोजनाओं संबंधी कार्यों को अब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से लेकर फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण को सौंप दिए गए हैं।

शाम ढलते ही सड़के बन जाती हैं मयखाना
शाम होते ही अराजक तत्व सड़क के किनारे गाड़ियां खड़ी कर सरेआम शराबखोरी और नशेबाजी करते हैं, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। ग्रेटर फरीदाबाद वेलफेयर एसोसिएशन के संयोजक रमेश गुलिया ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान ग्रेफ में दम तोड़ चुका है। उन्होंने बताया कि इलाके में 80 हजार फ्लैट हैं, इनकी सीवर लाइन को आजतक सीवर शोधन संयंत्रका से नहीं जोड़ा जा सका है। मास्टर प्लान में मास्टर ट्रीटमेंट प्लांट (एमटीपी) का निर्माण तय था, लेकिन अभी तक उसके लिए प्रशासन जमीन नहीं तलाश सका है। इस कारण बिल्डर सीवर का पानी टैंकरों से खुले मैदान में फेंकते हैं, जिससे भू-जल भी प्रदूषित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े इलाके में सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।

पुलिस चौकी और फायर स्टेशन की दरकार
मास्टर प्लान में हर चार सेक्टर के बीच एक पुलिस चौकी के अलावा पूरे इलाके में तीन फायर ब्रिगेड स्टेशन बनाए जाने की योजना थी। अभी तक न तो पुलिस चौकी बनी और न ही फायर स्टेशन बना है। शहर में 35 मंजिल तक की हाईराइज इमारतें हैं, लेकिन दमकल के पास करीब 10 मंजिल से ज्यादा ऊंची इमारत की आग बुझाने के साधन नहीं हैं। - प्रमोद मनोचा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, ग्रेफा

ग्रेटर फरीदाबाद में मूलभूत सुविधाओं का काफी अभाव है। सबसे बड़ी समस्या बिजली, पानी और सीवर की समस्या की है। सरकार ने बायर की समस्याओं के लिए ग्रीवांस कमेटी बनाई। इसमें लोग बिल्डर के खिलाफ शिकायत करते हैं, लेकिन कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित रहती है। - संजीव विश्वास, ग्रेटर फरीदाबाद निवासी
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वर्जन
ग्रेटर फरीदाबाद में सीवर-पानी की समस्या के समाधान के लिए काम शुरू कर दिया गया है। खस्ताहाल सड़कों को नए सिरे से बनाया जा रहा है। सोसाइटियों में पानी के कनेक्शन दिए जा रहे हैं। सीवर लाइन बिछाने का काम अभी कुछ सेक्टरों में बाकी है। इसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। - रमेश बांगडी, मुख्य अभियंता, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण
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