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Faridabad News: आरटीई का उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की मांग, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

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- जिले के 28 स्कूलों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत गरीब बच्चों को दाखिला न देने वाले प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ विवाद गहराता जा रहा है। पहले जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने जिले के 28 स्कूलों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश शिक्षा निदेशक को भेजी थी और अब ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन (आईपा) ने सीधे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


आईपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने शुक्रवार को भेजे गए पत्र में कहा है कि फरीदाबाद के प्राइवेट स्कूल राष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीईओ ने इस मामले को लेकर पहले भी शिक्षा निदेशक पंचकूला को दो पत्र लिखे, लेकिन स्कूलों की सशक्त लॉबी के दबाव में आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जिन बच्चों का नाम इन स्कूलों की आरटीई सूची में आया है, उन्हें तुरंत दाखिला दिलाया जाए।
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आईपा ने इसे गरीब बच्चों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया है। अग्रवाल का कहना है कि यह मामला केवल प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और समानता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही पीड़ित बच्चों के हित में ठोस कदम नहीं उठाए तो आईपा न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाएगा।



आईपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता कैलाश शर्मा ने भी कहा कि संगठन इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती तो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
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आरटीई कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों को 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं। आईपा की शिकायत है कि कई स्कूल इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
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