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Faridabad News: राष्ट्रीय लोक अदालत में उमड़ी भीड़, 69,987 मामलों का हुआ निपटारा

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ई-सेवा केंद्र के बाहर रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं, प्राधिकरण की ओर से गठित 17 बेंचों ने की सुनवाई
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। सेक्टर-12 स्थित न्यायिक परिसर में शनिवार को वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसी को लेकर सुबह 7 बजे से ही परिसर में वादकारियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों की भीड़ अधिक होने के कारण नंबर आने में काफी देर लगी। वहीं ई-सेवा केंद्र के बाहर रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और दिन भर यह सिलसिला जारी रहा। देर शाम तक भीड़ कम नहीं हुई। वहीं दूसरी तरफ विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से भी खास तैयारियां कर रखी थी। प्राधिकरण की ओर से गठित 17 बेंचों ने करीब 70 हजार मामलों का निपटारा करवा दिया।

फरीदाबाद में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन संदीप गर्ग की अध्यक्षता में लोक अदालत आयोजित हुई। आयोजन की देखरेख मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रितु यादव ने की।
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राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए कुल 17 बेंच गठित की गई थीं, जिनमें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी और अन्य न्यायिक दंडाधिकारियों ने मामलों की सुनवाई की। लोक अदालत में कुल 89,377 मामलों को सूचीबद्ध किया गया जिनमें से 69,987 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा कर दिया गया।



निपटाए गए मामलों में मोटर वाहन दुर्घटना के 58, छोटे-मोटे आपराधिक मामलों के 3,340, चेक बाउंस के 357, बिजली से संबंधित 687, समरी चालान के 61,892, वैवाहिक विवादों के 121, दीवानी मामलों के 223, बैंक रिकवरी के 1,359, राजस्व के 1,931 तथा श्रम विवादों के 19 मामले शामिल रहे।



ट्रैफिक चालान वाले लोगों की रही सबसे अधिक भीड़
आपको बताते चलें कि इस बार लोक अदालत में सबसे अधिक भीड़ वाहनों के चालानों का निपटारा करने वाले लोगों की रही। 60 हजार से अधिक लोगों को वाहनों के मोटे चालानों से राहत मिली। लोगों का कहना है कि शनिवार को दिन होने के चलते भीड़ और अधिक रही है। वहीं प्राधिकरण की तरफ से इस बार काफी अच्छी व्यवस्था की गई थी। जिससे मामलों का निपटारा भी जल्द हो पाया है।
हेल्प डेस्क से काम हुआ आसान
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि सबसे अधिक समस्या यह होती है कि किस मामले की सुनवाई किस बेंच पर होगी यह ढूंढना काफी कठिन होता है। लेकिन प्राधिकरण की तरफ से बनाए गए हेल्प डेस्क से काफी मदद मिली है। इससे जरूरी दस्तावेजों से संबंधित जानकारी के साथ किसी मामले में क्या प्रावधान रहेगा इसकी जानकारी भी काफी आसानी से मिल गई।
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इस बार ट्रैफिक चालानों से जुड़े मामलों को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। लोक अदालत में दिए गए फैसले अंतिम होते हैं, जिनके खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं है और वादकारियों को कोर्ट फीस भी वापस मिलती है। इससे समय और धन की बचत के साथ-साथ आपसी सौहार्द भी बना रहता है। लोक अदालत से संतुष्ट होकर बड़ी संख्या में लोग राहत की भावना के साथ अपने घर लौटे।-रितु यादव, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी
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