मोबाइल सिम कार्ड हैक कर खाता कर देते थे साफ, चार गिरफ्तार
- पुलिस ने एक आरोपी को मुंबई और तीन को झारखंड से पकड़ा
- रिमांड पर लेकर पूछताछ करने में जुटी साइबर सेल
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मोबाइल के सिम कार्ड को 3 जी से 4 जी में अपग्रेड करने का झांसा देकर फोन हैक कर खाते से रुपये उड़ाने वाले गिरोह के चार बदमाशों को पुलिस ने झारखंड व मुंबई से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से कई एटीएम कार्ड, एक पीओएस मशीन (कार्ड स्वेपिंग मशीन) व पासबुक बरामद की है। पुलिस आरोपियों को तीन दिन के रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस के अनुसार आरोपियों से कई मामले खुलने की उम्मीद है।
24 जुलाई को चार्मवुड विलेज, सूरजकुंड निवासी पूनम रानी ने सूरजकुंड थाने में मामला दर्ज करवाया था कि ठगों ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र स्थित उनके खाते से करीब 8.50 लाख रुपये निकाल लिए हैं। मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि खाते से पैसे निकलने से कुछ दिन पहले महिला के पास एक फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को मोबाइल कंपनी से बताया और पूछा कि क्या वे अपना सिम कार्ड 3 जी से 4 जी में अपग्रेड करना चाहती हैं। महिला ने सहमति जता दी, जिस पर उन्होंने महिला को एक एसएमएस मोबाइल कंपनी के कस्टमर केयर भेजने को कहा था। उसके बाद से उनके खाते से पैसे निकले हैं।
एक खातों की जानकारी उपलब्ध कराता था, दूसरे सदस्य फांसते थे
मामले की जांच करते हुए साइबर सेल और क्राइम ब्रांच सेक्टर-65 की टीम मुंबई, महाराष्ट्र पहुंची और वहां से गांव भरचंडी, जिला जामताड़ा, झारखंड निवासी अंशु दास को गिरफ्तार किया। पूछताछ करने पर पता चला कि अंशु पिछले काफी समय से मुंबई में रह रहा है। वह भी गिरोह के बाकी सदस्यों को लोगों के खातों की जानकारी उपलब्ध करवाता है, जिसके बाद गिरोह के दूसरे सदस्य उसे फांसने में लग जाते हैं। अंशु की निशानदेही पर पुलिस ने गांव घोसवाद, जिला जामताड़ा, झारखंड से उसके साथियों इरफान, मुजाहिद व याकूब अंसारी को उनके गांव से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इनके पास से एक कार्ड स्वेपिंग मशीन, बैंक की पास बुक के अलावा कई बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपियों को तीन दिन के रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।
मोबाइल नंबर हैक अपने खाते में ट्रांसफर किए रुपये
साइबर सेल प्रभारी इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि पकड़े गए आरोपी बहुत शातिर हैं। सिम कार्ड अपग्रेड करने के बहाने वे लोगों का मोबाइल नंबर ब्लैंक सिम कार्ड में अपने पास चालू करवा लेते हैं। सामने वाले को शक न हो। ऐसे में उससे उसके दूसरे नंबर के बारे में पूछते हैं। अमूमन लोग दो-दो मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में वे उस नंबर की कॉल उनके दूसरे नंबर पर डाइवर्ट कर देते हैं। ऐसे में उस नंबर पर आने वाले फोन डाइवर्ट होकर पीड़ित के दूसरे नंबर पर आ रहे होते हैं तो उन्हें सिम हैक होने का आभास नहीं होता। वहीं डायवर्ट किए गए नंबर के मेसेज (एसएमएस) ठगों के पास चल रहे सिम पर जा रहे होते हैं और वे आसानी से एप से जुड़े खातों से रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं।
आप भी बरतें ये सावधानी
- मोबाइल सिम कार्ड अपग्रेड करने की कोई कॉल आती है तो उस पर तुरंत विश्वास न करें। संबंधित फोन कंपनी में जाकर पहले पुष्टि करें।
- अपने मोबाइल फोन किसी भी तरह का आने वाला वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) किसी को न बताएं।
- संबंधित मोबाइल कंपनी की वेबसाइट पर जाकर या कस्टमर केयर में खुद फोन कर जानकारी ले।
- संभव हो तो सिम अपग्रेड करवाने के लिए मोबाइल कंपनी के कस्टमर केयर कार्यालय में जाकर ही उसे अपग्रेड करवाएं।