खुद को रस्सी से बांध पिता को वीडियो कॉल कर अपहरण की साजिश रची
फरीदाबाद। एनआईटी-दो निवासी किशोर ने गोवा घूमने जाने के लिए दोस्तों के साथ मिलकर खुद ही अपने अपहरण का ड्रामा रचा था। किसी को शक न हो इसलिए वॉट्सऐप से पिता को वीडियो कॉल कर खुद को रस्सी से बंधा हुआ दिखाया, जिसे तीन लोग घेरे हुए खड़े थे। अपहरणकर्ताओं की पहचान न हो जाए, इसलिए वीडियो में उनके पैर ही दिखाए गए थे। पुलिस ने इनमें से दो किशोरों को बुलंदशहर से, जबकि एक को एनआईटी-दो व अपहरण का ड्रामा रचने वाले किशोर मेट्रो ट्रेन में मिले। पुलिस ने चारों किशोरों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया है।
एनआईटी-दो निवासी सराफ का 12वीं कक्षा में पढ़ने वाला 17 वर्षीय बेटा एनआईटी-एक में ट्यूशन पढ़ता है। गत 16 जनवरी को किशोर अपनी स्कूटी लेकर ट्यूशन जाने के लिए निकला था। इस दौरान उसके पिता के पास मैसेज आया कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है और उसकी सलामती चाहते हो तो चार लाख रुपये का इंतजाम कर लो। मेसेज देखते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। थाना कोतवाली पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर क्राइम ब्रांच सेक्टर-30 व क्राइम ब्रांच बड़खल की टीम को जांच में लगा दिया। पुलिस ने इस मामले का पटाक्षेप करते हुए शनिवार को अपहृत किशोर सहित उसके तीन दोस्तों को बरामद कर लिया। डीसीपी एनआईटी विक्रम कपूर ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि किशोर ने खुद ही अपने अपहरण का सारा ड्रामा रचा था।
फिरौती की रकम के लिए दिल्ली और नोएडा में घुमाते रहे
क्राइम ब्रांच सेक्टर-30 प्रभारी निरीक्षक विमल कुमार ने बताया कि घर से ट्यूशन के लिए निकले किशोर ने अपनी स्कूटी तिकोना पार्क में ही छोड़ दी थी और यहां से ऑटो लेकर बदरपुर बार्डर मेट्रो स्टेशन पहुंचा, वहां से वह दिल्ली चले गए। शाम को ही किशोर ने वॉट्सऐप फोन कर चार लाख रुपये की फिरौती मांगी और रुपये लेकर बदरपुर बार्डर मेट्रो स्टेशन बुलाया। मगर वहां पैसे लेने कोई नहीं गया। किसी को शक न हो इसलिए किशोर बार-बार जगह बदल रहे थे। इस दौरान किशोर ने अपने पिता को एम्स अस्पताल, दिल्ली, कश्मीरी गेट बस अड्डे, सराय काले खां, छतरपुर मंदिर, नोएडा एक्सप्रेसवे, आनंद विहार बस अड्डे पर बुलाया। मगर कहीं भी कोई पैसे लेने नहीं पहुंचा। इस दौरान क्राइम ब्रांच की टीमें भी उनके पीछे लगी हुई थी और तकनीक की मदद से उन्हें ढूंढ निकाला।
ओला कैब का लिया सहारा
पूछताछ के दौरान किशोरों ने पुलिस को बताया कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए वे ओला कैब करते थे। घर से निकलने के दौरान किशोर अपने साथ आठ-दस हजार रुपये ले गया था। इतना ही नहीं योजना को अमली जामा पहनाने के लिए किशोरों ने अपहरण का ड्रामा करने से कुछ दिन पहले ही डबुआ कॉलोनी में एक कमरा किराए पर लिया था और वहीं ठहर रहे थे। अपहरण के ड्रामे का मास्टर मांइड खुद अपहृत किशोर खुद ही था, जबकि इस खेल में उसने अपने एक क्लास मेट, एक पड़ोसी और फेसबुक पर दोस्त बने उत्तर प्रदेश निवासी एक किशोर को भी साथ मिलाया था।
सावधान इंडिया देखकर बनाई थी योजना
क्राइम ब्रांच बड़खल प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि किशोर को पता था कि उसके घर में रुपये रखे हैं। इसलिए उसने चार लाख रुपये ही मांगे, ज्यादा की मांग नहीं की। किशोर को पता था कि वह पिता से पैसा मांगता तो उसे नहीं मिलता। इस पर उसने सावधान इंडिया देखकर अपने खुद के अपहरण की योजना रच डाली। इस दौरान किशोरों ने पुलिस और परिजनों को चकमा देने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया।