फर्जी बिल पर्चा प्रकरण : दिल्ली, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों के 75 लोग जांच के घेरे में
फरीदाबाद। फर्जी बिलों के आधार पर केंद्रीय जीएसटी विभाग को करोड़ों रुपये की चपत लगाने के मामले में जीएसटी विभाग की विजिलेंस टीम ने जांच तेज कर दी है। टीम ने दिल्ली, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों के 75 लोगों को जांच के घेरे में लिया है। इन्होंने आरोपी अनिल से कच्चे माल के फर्जी बिलों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया था।
तीन दिन पूर्व सीजीएसटी विभाग की विजिलेंस टीम ने फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के आरोप में बल्लभगढ़ से कांग्रेसी नेता व कारोबारी मनोज अग्रवाल और उसके साथी अनिल को गिरफ्तार किया था। मनोज अग्रवाल की बल्लभगढ़ में रबड़ का सामान बनाने की फैक्ट्री है। उसने जीएसटी विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन भी करवा रखा है। मनोज यह घोटाला अपने साथी नहरपार निवासी अनिल कुमार के साथ मिलकर कर रहा था। मनोज, अनिल से कच्चे माल की जगह बिल की पर्ची लेता और इनपुट टैक्स क्रेडिट का सरकार से लाभ ले रहा था। दोनों ही आरोपी लंबे समय से जीएसटी अदा नहीं कर रहे थे। इस पर विभाग ने शक के आधार पर जब मामले की जांच शुरू की तो पता चला करीब डेढ़ साल से आरोपी फर्जी बिलों के आधार पर विभाग को जीएसटी की चपत लगा रहे थे। संयुक्त आयुक्त सीजीएसटी विभाग क्षतेंद्र वर्मा ने बताया कि दोनों आरोपी करीब आठ करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले चुके थे। मामले की गहनता से जांच की गई तो पता चला दिल्ली, गुजरात और राजस्थान समेत कई राज्यों के 75 लोग इस घोटाले में शामिल है। यह सभी अनिल से कच्चा माल के रूप में बिल पर्ची लेते थे और अनिल को उसका कमीशन दे देते थे।
वर्जन
सीजीएसटी विभाग ने फर्जी बिलों के आधार पर सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगाने के आरोप में 75 लोगों की पहचान कर ली है। सभी विभाग राडार पर है। इन्होंने करीब 6 करोड़ रुपये के इनपुट क्रेडिट टैक्स का घपला किया है। सभी आरोपियों से ब्याज सहित बकाया वसूलने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन्होंने टैक्स नहीं भरा तो मनोज और अनिल की तरह यह भी जेल में होंगे।
- क्षतेंद्र वर्मा, संयुक्त आयुक्त, केंद्रीय जीएसटी विभाग फरीदाबाद।