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कोविड-19 संक्रमण : दिल्ली-एनसीआर में हालात सुधरे, बढ़ी जांच से फायदा

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Covid : Improved in Delhi-NCR, benefit from increased investigation
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फरीदाबाद। देश में कोरोना संक्रमण की दर रफ्तार पकड़ने लगी है। दिल्ली-एनसीआर में मरीजों की सक्रियता घटने से यह दर मध्यम स्तर पर है। दिल्ली के बढ़ते मरीजों का बोझ झेल रहे एनसीआर में राजधानी की राहत का भी असर दिख रहा है। साथ ही जांच बढ़ने के कारण मरीजों की जल्दी पहचान हो पा रही है। जांच दर के हिसाब से दिल्ली में अब तक सबसे अधिक करीब पौने ग्यारह लाख लोगों की जांच की जा चुकी है। हालांकि दो करोड़ से अधिक आबादी वाली राजधानी में जनसंख्या के मुकाबले में केवल अभी तक एक फीसदी लोगों की जांच भी नहीं की जा सकी है।
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देश में विगत चार माह के दौरान कोविड-19 के संक्रमण से दिल्ली की धड़कने तेज हुई तो इसका सीधा असर गुरुग्राम और फरीदाबाद पर भी दिखा। एनसीआर के दोनों ही जिलों में मामले दस-दस हजार के पास पहुंच चुके हैं। एनसीआर में अब तक सबसे अधिक जांच गुरुग्राम और फरीदाबाद में हुई। करीब 25 लाख की आबादी वाले गुरुग्राम में अब तक एक लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। इसी प्रकार करीब 23 लाख की आबादी वाले फरीदाबाद में 83 हजार लोगों की जांच हो चुकी है।
मामलों के प्रति उदासीनता गंभीर पहलू
गुरुग्राम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ना चिंता का विषय नहीं है। मामलों के प्रति उदासीनता गंभीर पहलू है। बीते एक माह में इस पहलू पर काम किया गया है। फिलहाल मामले घट रहे हैं। कोरोना जांच की संख्या बढ़ने के कारण लोगों की टेस्टिंग और ट्रेसिंग आसान हुई है। मरीजों के गंभीर होने से पहले ही इलाज हो रहा है। संक्रमित के संपर्क में आने वाले लोगों को कुछ सावधानियां बरतने के लिए कहा जाता है, तो यह लोग संक्रमित होने से भी बच रहे हैं और मामले के विस्तार पर लगाम लगाने में मदद कर रहे हैं। हर माह 5 फीसदी औद्योगिक कर्मचारियों-अधिकारियों की ट्रेसिंग का लक्ष्य है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि कोरोना के मामले फिर बढ़ सकते हैं, लेकिन उपचार सुविधाएं इससे प्रभावित नहीं होंगी।
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गंभीर मरीजों की संख्या पर नियंत्रण की पूरी तैयारी
फरीदाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया का दावा है कि मामले फिलहाल घट रहे हैं और टेस्टिंग बढ़ रही है। अनलॉक के साथ चुनौतियां बढ़ती हैं। इस कारण भविष्य में मामलों के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन गंभीर मरीजों की संख्या पर नियंत्रण की पूरी तैयारी है। राजधानी सहित सभी एनसीआर में इस माह संक्रमण परिपक्वता के बाद मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। अब मामलों की सकारात्मकता दर में कमी आई है। जांच की दर बढ़ने के बावजूद मरीजों की संख्या तुलनात्मक काफी कम है।
संक्रमण के कमजोर टारगेट वाली आबादी पर ध्यान
गौतमबुद्धनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीबी डाका का कहना है कि शुरुआती दौर में तेजी से बढ़ने वाले कोरोना संक्रमण के मामलों की दर में अब गिरावट आई है। टेस्टिंग बढ़ने से गंभीर मरीजों की जानकारी पहले ही लग जाती है। संक्रमण के कमजोर टारगेट वाली आबादी पर ध्यान है। महामारी को बढ़ने से नहीं रोका जा सकता। चूंकि वह पहले ही विस्तृत हो चुकी है। ऐसे में उसके दुष्प्रभावों को कम करना ही भविष्य की संभावनाओं में शामिल है।
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