संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति लाम्बा की अदालत ने 17 अप्रैल को चेक बाउंस मामले में फैसला सुनाते हुए परवीन कुमार अग्रवाल को दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के 26 मई 2022 के दोष सिद्धि आदेश और तीस मई 2022 की सजा को गलत ठहराते हुए रद्द कर दिया।
यह मामला राम सिंह वर्मा बनाम परवीन कुमार अग्रवाल के बीच चल रहा था, जिसमें शिकायतकर्ता राम सिंह वर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने वर्ष 2014-15 में कुल पांच लाख रुपये उधार दिए थे। इसके बदले परवीन कुमार अग्रवाल को चार लाख रुपये का चेक जारी किया, जो बैंक में धनराशि अपर्याप्त के कारण बाउंस हो गया।
ट्रायल कोर्ट ने इस आधार पर उस वक्त आरोपी को दोषी ठहराते हुए एक साल की साधारण कारावास और चार लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, अपील की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि उन्होंने वास्तव में पांच लाख रुपये का कर्ज दिया था। अदालत ने माना कि दूसरी बार 2.5 लाख रुपये नकद देना बिना किसी दस्तावेज, रसीद या गवाह के अप्राकृतिक और अविश्वसनीय है, खासकर तब जब पहली रकम पूरी तरह वापस नहीं हुई थी।
अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता अपनी वित्तीय क्षमता साबित नहीं कर सके और न ही किसी प्रकार के दस्तावेज प्रस्तुत कर पाए। ऐसे में यह संदेह पैदा होता है कि चेक वैध देनदारी के बजाय केवल सिक्योरिटी के तौर पर दिया गया था।
साथ ही, अदालत ने आरोपी के इस पक्ष को संभावित माना कि ब्लैंक साइन चेक का दुरुपयोग किया गया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत और अस्थिर बताते हुए रद्द कर दिया और आरोपों से बरी कर दिया।