फरीदाबाद। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले आम बजट में उद्योगों सहित हर वर्ग को ध्यान रखा गया था। इससे उद्योगों, किसानों के अलावा आयकर दाताओं को बेहतर आर्थिक स्थिति रहने की उम्मीद थी। हालांकि कोरोना काल के कारण सब चौपट हो गया। लोगों की जेब में रखा पैसा इलाज और आर्थिक तंगी के कारण न तो निवेश में लगा न ही किसी और बेहतर कार्य की उम्मीद में। इस कारण लगभग एक साल तक वित्तीय उम्मीद के साथ जीवन में भी निराशा छाई रही।
ऑल इंडिया मैन्युफैक्चर्स ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष एसके सचदेवा मानते हैं कि उद्योग जगत को बूम की जरूरत है। कोरोना काल में बीते साल से मिली बजट की सारी उम्मीद बे-बुनियाद रही। हालांकि बीते कुछ माह से चीजें बेहतर हो रही हैं। जीडीपी ग्रोथ के साथ उम्मीदें भी बढ़ने लगी हैं। सरकार ने अपनी सार्थकता दिखाते हुए उद्योगों को कई तरह के लोन, नॉन गारंटी लोन ऑफर किए। यदि सरकार सभी वर्गो को ध्यान में रखते हुए संतुलित बजट देती है तो आमजन के बीच और विश्वपटल पर देश को दोबारा जाने में देर नहीं लगेगी। उम्मीदें बनी हुई हैं।
फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष बीआर भाटिया का मानना है कि आयकर छूट सीमा में बदलाव, एक्सपोर्ट हब खोलने की घोषणाएं बीते बजट में काफी लुभावनी थी। इससे उद्योग जगत को काफी उम्मीदें भी थी। वहीं कोरोना काल के कारण लोगों की जिंदगी बिल्कुल खस्ता हाल हो गई। ज्यादातर लोग बेरोजगार हो गए। वहीं, सैकड़ों कंपनियां इस बीच बंद भी हो गई। इससे निश्चित ही हर एक की जिंदगी को धक्का लगा है। अब सब कुछ पटरी पर लाने के लिए एक बड़े बूम की जरूरत है। कोरोना तो निपट रहा है, लेकिन जिंदगियां अब भी संघर्ष कर रही हैं। केंद्र से पूरी उम्मीद है कि वह आत्मनिर्भर भारत की तर्ज पर ऐसे पैकेज की घोषणा करेगी कि हर आदमी के चेहरे पर मुस्कान लौटेगी।
सरकार से उम्मीदें इसलिए भी ज्यादा हैं कि मोदी 2.0 कार्यकाल के पहले बजट के बाद कोविड से पूरा देश और दुनिया बेहाल रहा। लॉकडाउन ने जीने का तरीका, उम्मीदें, संभावनाओं सभी पहलुओं को एक नया परिदृश्य दिया है। ऐसे में केंद्र सरकार का यह बजट उम्मीदों का पिटारा बने, ऐसी आस किसान आमजनता, आयकर दाता, उद्यमी, एक्सपोर्ट हाउस, मैन्युफैक्चर सेक्टर, रियल एस्टेट सभी वर्गों को है।