बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की मूर्ति को अंतिम रूप देती चित्रकार।
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कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझे उद्योग धंधे अब धीरे-धीरे उबर रहे हैं लेकिन हस्त शिल्पियों के सामने संकट अभी भी बरकरार है। अगस्त में गणेश चतुर्थी और फिर अक्तूबर में दुर्गा पूजा पर निराशा झेल चुके मूर्तिकार आगामी 16 फरवरी को आने वाली बसंत पंचमी की तैयारियों में जुट गए थे। हालांकि मेहनत के अनुरूप आमदनी न होने से मूर्तिकार एक बार फिर से निराश हैं। वहीं, बेहतर मुनाफे के लिए इस बार छोटी मूर्ति बनाकर भारी खरीद की उम्मीद की थी। यह रणनीति भी कुछ खास काम न आ सकी। शायद यही कारण है कि सेक्टर-16 निवासी मूर्तिकार परिवार बीते एक माह से सरस्वती की मूर्ति के लिए खरीदारों की बाट देख रहा है। बंपर मूर्तियां बनाने के बावजूद उन्हें केवल दो तीन बुकिंग ही मिली हैं।
16 फरवरी को बसंत पंचमी है। शहर के सेक्टर-16ए स्थित मूर्तिकार एक महीने से मां सरस्वती की मूर्तियां बना रहे हैं। यहां ढाई फुट से छह फीट ऊंचाई तक की मूर्तियों को संवारा जा रहा है। हर साल छह से आठ फुट की मूर्तियों की काफी मांग रहती है। इसके अलावा लोग छोटी मूर्तियां भी खूब खरीदते है। दो साल के तुलना में दाम में करीब 20 फीसदी की कटौती की गई। इस बार चार फुट की मूर्तियों की कीमत तीन हजार रुपये है जबकि छह फुट की मूर्ति की कीमत पांच हजार रुपये है। इसके बावजूद खरीदार नहीं मिल रहे।
एक साल से कर्जे में डूबा है परिवार
सेक्टर-16ए स्थित मेट्रो अस्पताल के पास मूर्तियां बनाने वाली जमुना देवी ने बताया कि यह त्योहार उनके लिए खास है। पिछले साल खरीद नहीं होने के कारण वह कर्जे में डूबी हुई हैं। हर बार एक त्योहार में 40 से 50 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती थी। इस बार मूर्तियों का खर्चा भी नहीं निकाल पा रहे। मूर्तियां रखने की जगह नहीं बची है। नुकसान के डर से अतिरिक्त मूर्तियां नहीं बनाईं।
परिवार की 25 वर्षीय मूर्तिकार पूनम ने बताया कि खानदानी हुनर उन्होंने बचपन से ही सीख लिया था। परिवार मूर्ति बनाने का कच्चा माल दिल्ली से लाता है। एक मूर्ति 10 से 12 दिन में तैयार होती है। मूर्ति को आकार देने के बाद के लिए छोड़ा जाता है, फिर रंग भरे जाते हैं। तीन से चार फीट की मूर्ति पर करीब दो हजार रुपये खर्च आता है, आमदनी करीब चार से पांच सौ रुपये आता है।