270 छात्र ले चुके हैं दाखिला, पांच किलोमीटर दूर दूसरे कॉलेज में लग रही हैं कक्षाएं
हेमलता
फरीदाबाद। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सेक्टर-23 में आधुनिक सुविधाओं से लैस राजकीय महाविद्यालय बनाने की योजना बनाई गई थी लेकिन जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। कॉलेज बनने से पहले ही दाखिले शुरू कर दिए गए। दो साल में कुल 270 छात्रों ने दाखिला ले भी लिया। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी जमीन का लेआउट तैयार किया गया है। जिसको मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा।
सेक्टर-23 स्थित बिजली मुख्यालय के करीब साढ़े पांच एकड़ जमीन पर राजकीय महाविद्यालय बनाने की योजना को बनाई गई थी। करीब चार लाख की घनी आबादी के बीच बनने वाले इस नए महाविद्यालय से सैकड़ों छात्रों का उच्च शिक्षा का सपना पूरा हो सकेगा। राज्य सरकार ने बिजली विभाग की इस जमीन को शिक्षा विभाग को ट्रांसफर कर दिया है। वहीं शिक्षा विभाग की ओर से इस जमीन की कीमत करीब 53 करोड़ रुपये बिजली विभाग को दे दी है। यह कॉलेज 28 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना है। करीब दो साल से कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
5 किलोमीटर दूर है खेड़ी गुजरान कॉलेज
सरकार की ओर से सेक्टर 23 महाविद्यालय के नाम पर विद्यार्थियों का दाखिला करवाया गया, लेकिन उनकी कक्षाएं खेड़ी गुजरान स्थित राजकीय महाविद्यालय में लगाई जा रही हैं। जोकि सेक्टर 23 से करीब 5 किलोमीटर दूर है। विद्यार्थियों ने घर के पास कॉलेज होने के चलते दाखिला लिया था। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी अभी तक कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
बिल्डिंग का पहले ही हो गया नामकरण
बल्लभगढ़ के सेक्टर 23 में बनने वाले सरकारी कॉलेज का नाम शहीद भगत सिंह सरकारी सह-शिक्षा महाविद्यालय रखा गया है। कॉलेज का अभी निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हुआ है लेकिन उससे पहले ही उसका नामकरण हो गया है। यह कॉलेज बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा प्रदान करेगा और जब तक इसका नया भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक कक्षाएं राजकीय महाविद्यालय खेड़ी गुजरान में संचालित की जा रही है।
अभी जमीन का लेआउट तैयार किया गया है
लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रकाश लाल ने बताया कि अभी जमीन का लेआउट तैयार किया गया है। पास होने के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा। उसके बाद भवन का नक्शा बनाया जाएगा। नक्शा बनने के बाद उसको भी पास होने के लिए भेजा जाएगा। जिसके बाद टेंडर के जरिये निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।