फरीदाबाद। कोरोना महामारी के कारण प्रदेश के नौ जिलों में साप्ताहिक लॉकडाउन लगाया गया है। जिले में लॉकडाउन की तस्वीर कुछ ऐसी है कि केवल दुकानों के शटर नीचे कराने तक ही यह सिमट गया है। लॉकडाउन का नजारा पूरे शहर में ऐसा कहीं नहीं दिखा कि लोगों को कोरोना का खौफ या प्रशासन की सख्ती महसूस हो। कई इलाकों में पुलिस की मौजूदगी जरूर दिखी लेकिन सख्ती के नाम पर केवल दुकानों को ही बंद कराया जा रहा था। बदरपुर बॉर्डर के आसपास पुलिस बल की तैनाती थोड़ी ज्यादा थी। यहां दिल्ली व फरीदाबाद पुलिस के साथ ही सीआरपीएफ के जवान भी तैनात रहे।
शहर के मुख्य बाजारों जैसे एनआईटी-1, 2, 5, ओल्ड फरीदाबाद, सेक्टर 15, 14, बल्लभगढ़ मुख्य बाजार की दुकानों और सुबह से ही ताले लगे हुए थे। पुलिस की पीसीआर सुबह से ही गश्त करने में लगी हुई थी। गली मोहल्ले में बनी दुकानों पर ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। शहर के सभी मुख्य मार्गो पर वाहनों की आवाजाही और दिनों से थोड़ी कम भले ही रही हो, लेकिन रोक टोक के नाम पर कुछ नही था। पुलिस के मास्क के चालान के नाम पर सख्ती जारी रखी। फैक्ट्रियों के संचालन पर कोई रोक नहीं होने के चलते लोग सुबह व छुट्टी के समय बेधड़क सड़कों पर घूमते नजर आए। शाम करीब पांच बजे मथुरा रोड स्थित साई एक्सपोर्ट कंपनी की छुट्टी के समय सैकड़ो की संख्या में कर्मचारी सड़क पर एकत्रित हो गए। वाहनों के आने तक ज्यादातर कर्मचारी सड़क पर ही जमा रहे। एनआईटी पांच स्थित मुख्य मार्केट के दुकानदार विजय सब्बरवाल का कहना है कि सरकार कोरोना को रोकने के लिए कदम उठा रही है। ऐसे में सभी के लिए नियम समान होने चाहिए। फैक्ट्रियों में सैकड़ों और हजार तक की संख्या के कर्मचारी एक साथ काम करते हैं। सरकार उन्हें चलाने की अनुमति दे रही है, जबकि छोटे व्यापारी का काम बंद किया जा रहा है। पलायन का दौर फिर से हुआ शुरू। लॉकडाउन की घोषणा के बाद से जिले के प्रवासी लोगों का पलायन फिर से शुरू हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग से लोगों को पैदल जाते हुए देखा गया। बस अड्डे के आसपास भी मजदूरों की खासी भीड़ देखने को मिली। इसके साथ ही बल्लभगढ़ मंडी के पास प्रवासी मजदूर वाहनों का इंतजार करते नजर आए।