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Faridabad News: मजबूरी के सागर ने छुड़ाई पढ़ाई, ब्रिज कोर्स बनेगा सेतु

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- ड्रॉपआउट छात्रों के लिए एक जुलाई से शुरू होंगी कक्षाएं, 9 महीने का होगा कोर्स
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शिक्षा विभाग पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों के लिए 9 महीनों का ब्रिज कोर्स शुरू करेगा। इसमें बच्चों को उम्र के अनुसार उसकी कक्षा का पाठ पढ़ाया जाएगा, ताकि वह मुख्यधारा की शिक्षा में लौट सकें।विभाग की योजना के तहत इन बच्चों की नियमित कक्षाएं एक जुलाई से शुरू कर दी जाएंगी।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में वर्तमान में दो हजार से अधिक ऐसे बच्चे चिन्हित किए गए हैं, जिन्होंने पारिवारिक या आर्थिक वजहों से स्कूल जाना बंद कर दिया था। अब इन बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से उसी कक्षा का जरूरी ज्ञान दिया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा 9 महीने का एक विशेष ब्रिज कोर्स चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों का बेसिक मजबूत करना है ताकि वे आगे की पढ़ाई आसानी से कर सकें। इस काम के लिए विभाग ने 30 से अधिक वॉलंटियर्स का चयन किया है, जो इन बच्चों को पढ़ाएंगे और उनका सही मार्गदर्शन करेंगे। ब्रिज कोर्स शुरू होने से पहले ये वॉलंटियर्स एक बार फिर सर्वे करेंगे ताकि पता लगाया जा सके कि ड्रॉपआउट बच्चे इस समय कहां रह रहे हैं।
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जिले के 33 केंद्रों पर होगी पढ़ाई

शिक्षा विभाग ने बच्चों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा है। बल्लभगढ़ और फरीदाबाद खंड को मिलाकर कुल 33 विशेष केंद्र बनाए गए हैं, जहां इन बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ड्रॉपआउट बच्चों को उनके घर के सबसे नजदीक वाले केंद्र में ही दाखिला दिया जाएगा, ताकि उन्हें स्कूल आने-जाने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्टेशनरी और शैक्षणिक भ्रमण की भी मिलेगी सुविधा

इन बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए विभाग द्वारा सभी जरूरी कॉपी-किताबें और स्टेशनरी का सामान बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा बच्चों का मन पढ़ाई में लगा रहे और उनका मानसिक विकास हो, इसके लिए कोर्स के दौरान उन्हें शैक्षणिक भ्रमण पर भी ले जाया जाएगा।
वर्जन
ब्रिज कोर्स के माध्यम से बच्चों को फिर से मुख्य धारा में जोड़ा जाएगा। विभाग का यही प्रयास है कि किसी भी कारण से बच्चों की पढ़ाई ना छूटे।-सुरेश कुमार, समन्वयक
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खर्च उठाना मुश्किल
- आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बच्चे परिवार की आमदनी में हाथ बंटाने या बाल श्रम करने को मजबूर हो जाते हैं। दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षा निशुल्क होती है लेकिन घर से दूरी, किताबों, परिवहन और अन्य खर्चां का बोझ कई ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों को असहज कर देता है। इसके साथ ही बाल विवाह समेत कई कारण ऐसी परिस्थितियां पैदा करते हैं।
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