फरीदाबाद। दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर बसे खोरी गांव में कोरोना संकट के दौरान पहले भुखमरी में लोगों ने बैंक से लोन लेकर बच्चों का पेट भरा है। अब आशियाना छिनता देख वे जीना-मरना एक बराबर समझ रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब आशियाना ही नहीं रहेगा, तो बैंक का लोन और लोगों का कर्ज कैसे चुका देंगे। इस कारण गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। तोड़फोड़ के डर से लोग अपने घरों में दुबके हुए हैं। वहीं प्रशासन भी तोड़फोड़ को लेकर पूरी तरह तैयार है।
गांव खोरी में 10 हजार से ज्यादा मकान हैं। यहां करीब 50 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। दिल्ली की सीमा के नजदीक होने के कारण भूमाफिया ने भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाकर खूब जमीनें बेची हैं। सात जून को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर खोरी गांव में तोड़फोड़ कर नगर निगम और प्रशासन को खाली करवाने के आदेश दिए। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली वन क्षेत्र में बसे खोरी गांव के करीब 10 हजार मकानों को ढहाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इससे लोग और ज्यादा परेशान हैं। गांव में घरों के बाहर बैठे लोगों ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि अपने जमीन बेचकर किसी तरह यहां मकान बनवाए थे। कोरोना के कारण डेढ़ साल से नौकरी छूटी हुई है। ऐसे में किसी तरह बैंक से लोन लेकर बच्चों का पालन-पोषण कर रहे है। उम्मीद थी कि कोरोना जाने के बाद दिन काम कर कर्जदारों का कर्ज चुका देंगे। अब वह भी संभव नहीं दिखाई देता है। गांव की हालत यह है की बातचीत के दौरान लोगों के आंसू तक निकल आए। रोते हुए लोगों ने कहा कि सरकार किसी तरह तरह हमारे मकानों को टूटने से बचा लें, नहीं तो वह जीते जी मर जाएंगे।
घर में बिजली न होने से गर्मी से तड़प रहे मरीज
गांव खोरी में तोड़फोड़ से पहले प्रशासन की ओर से गांव की बिजली काट दी गई। इससे भीषण गर्मी के कारण लोगों का बुरा हाल है। गर्मी में मरीज घर में तड़प रहे हैं। महिलाएं हाथ का पंखा डुलाकर काम चला रही है। पुलिस प्रशासन की कार्रवाई के डर से गलियां सूनी पड़ी है। लोगों का कहना है कि गली में पांच छह लोग इकट्ठे होते है तो पुलिस उन्हें उठा ले जाती है। ऐसे में घरों के बाहर खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है।
मुनादी का काम लगातार जारी
नगर निगम और पुलिस प्रशासन की ओर से गांव में मुनादी का काम लगातार जारी है। रविवार को अधिकारियों ने सुबह शाम अनाउंसमेंट कर लोगों को घरों को खाली करने के लिए मुनादी की। अधिकारियों ने कहा कि लोग अपने घरों को स्वयं खाली कर दें, नहीं हो प्रशासन द्वारा उन्हें तोड़ दिया जाएगा।
लोगों से बातचीत
डेढ़ साल से नौकरी छोड़ी हुई है। बैंक में जो पैसा था उससे घर खर्च चला रहे थे। एक साल में वह भी खत्म हो गया। ऐसे में लोन लेकर बच्चों का पेट भर रहे है। आशियाना उजड़ने से कर्ज तले और बद जाएंगे। - आरपी शर्मा, स्थानीय निवासी
मूल रूप से बिहार का रहने वाला हूं। गांव की जमीन बेच कर यहां जमीन खरीदी थी। छह माह पहले ही पक्का मकान बनाकर रखना शुरू किया कि अब तोड़फोड़ के आदेश आ गए। - प्रमोद, स्थानीय निवासी
बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया। घर खर्च चलाने के लिए कर्ज किया। इस तरह से करीब दो लाख रुपये का कर्ज हो गया है। बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई। मकान भी टूट रहा है। इससे भारी तनाव में है। - कादिर हुसैन, स्थानीय निवासी
मोदी सरकार लोगों को घर देने की बात करती है लेकिन अब जब लोगों पर मुसीबत आई है तो कोई सुनवाई नहीं हो रही है। लोगों को पहले पुनर्वास कर स्थापित किया जाएगा। उसके बाद तोड़फोड़ की जाएगी। - किशन, स्थानीय निवासी