-अस्पताल का भवन है जर्जर, अन्य व्यवस्थाएं भी नदारद, मरीज परेशान
-गांव में हेपेटाइटिस व पीलिया से सात मौत के बाद भी नहीं सुधरे हालात
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। हेपेटाइटिस बी, सी और पीलिया के बढ़ते प्रकोप से जूझ रहे छांयसा गांव में जिस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वही केंद्र खुद बदहाली की हालत में है। गांव में अब तक चार मौतें हेपेटाइटिस बी और तीन मौतें पीलिया से हो चुकी है। 17 से अधिक लोगों में हेपेटाइटिस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जिससे करीब 40 हजार की आबादी में दहशत का माहौल है।
अधिकांश पद पड़े हैं खाली :
पीएचसी केंद्र में दो मेडिकल अधिकारी के पद स्वीकृत हैं, पर केवल एक ही कार्यरत है, जिनके पास हथीन का भी अतिरिक्त प्रभार है। पांच स्टाफ नर्स में दो पद खाली हैं। फार्मासिस्ट का पद रिक्त है, जिसके कारण दवाओं का वितरण प्रभावित हो रहा है। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मियों के पांच में से दो पद भी खाली हैं। जांच सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण मरीजों को सामान्य बुखार में भी निजी क्लीनिक या झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हेपेटाइटिस संक्रमण फैलने में झोलाछापों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि ये एक ही सिरिंज का कई बार उपयोग करते हैं और मरीजों को स्टेरॉयड देते हैं, जिससे संक्रमण बढ़ने की आशंका है।
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पीएचसी की इमारत जर्जर :
स्वास्थ्य केंद्र की इमारत भी जर्जर होती जा रही है। चार साल पुरानी बिल्डिंग में दरवाजे-खिड़कियां टूट चुकी हैं, छत झड़ रही है और लेंटर गिरने की स्थिति में है। परिसर में झाड़ियां उगी हुई हैं और अस्पताल तक जाने वाला रास्ता कच्चा है, जहां बरसात में जलभराव हो जाता है। कच्चा रास्ता होने के कारण मरीजों को पीएचसी तक पहुंचने में काफी समस्या होती है। गांव में हेपेटाइटिस और पीलिया के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती की है। पीएचसी की हालत खराब होने के कारण एंबुलेंस को सरपंच के घर के बाहर खड़ा किया गया है। इसके साथ ही सरपंच के घर के बाहर ही स्वास्थ्य विभाग की टीम कैंप कर रही है।
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चार साल पहले ही हुआ था तैयार :
साल 2010 में तत्कालीन मुख्य संसदीय सचिव जलेब खान ने इस केंद्र का शिलान्यास किया था। निर्माण कार्य वर्षों तक अटका रहा। इसके बाद साल 2018 में भवन बनकर तैयार हुआ और साल 2022 में उद्घाटन के बाद इसे शुरू किया गया। दावा था कि छांयसा सहित मठेपुर, दुरेन्ची, बीघावली, हुचपुरी, स्वामिका और महलुका गांवों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। लेकिन हकीकत यह है कि पीएचसी स्टाफ और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है।
क्या कहते है अधिकारी
पीएचसी छांयसा तक जाने वाली जर्जर सड़क का मामला मेरे संज्ञान में है। सड़क को 15 दिन के भीतर दुरुस्त कराने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। मरीजों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है और उपचार के लिए आने-जाने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। संबंधित विभाग को जल्द कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त