फरीदाबाद। खोरी गांव में जमीन की अवैध रूप से खरीद-फरोख्त के आरोप में अब भू माफिया के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लगातार इस बात को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे। तोड़फोड़ की कार्रवाई के आदेश के बाद हर कोई यहां रहने वालों से ज्यादा जमीन बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बृहस्पतिवार को सूरजकुंड थाने में तीन लोगों के खिलाफ तीन मामले दर्ज हुए हैं। इनमें एक मामला नगर निगम के संयुक्त आयुक्त व दो मामले खोरी गांव निवासियों की शिकायत पर दर्ज किए गए हैं।
नगर निगम के संयुक्त आयुक्त जितेंद्र कुमार ने सूरजकुंड थाने में दी शिकायत में कहा कि खोरी गांव में नगर निगम की 150 एकड़ जमीन है। यह जमीन पंजाब भू संरक्षण अधिनियम (पीएलपीए) के तहत वन क्षेत्र में आती है। नगर निगम के सर्वे में यह सामने आया है कि करीब 20 लोगों ने यहां जमीन को अलग-अलग टुकड़ों में बेच दिया। इसके लिए भू माफिया ने जमीन के फर्जी कागजात तैयार किए और लोगों को कब्जा दे दिया। यहां लोगों को बिजली-पानी की सुविधा भी अवैध रूप से दी जा रही है। संयुक्त आयुक्त ने आरोपियों को पहचान कर जल्द व सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं गांव खोरी निवासी छाया ने पुलिस को बताया कि एक प्रापर्टी डीलर ने साल 2017 में फर्जी जरनल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) कर उन्हें 50 गज का प्लाट दो लाख रुपये में बेचा था। जब उन्होंने चिनाई शुरू की तो तेजवीर नाम के व्यक्ति ने उनसे पांच हजार रुपये लेने के बाद मकान बनाने दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें पता लगा है कि उन्हें यह जमीन धोखे सेे बेची गई थी। यह जमीन नगर निगम की है।
वहीं गांव की ही शकुंतला नाम की महिला की शिकायत पर तीसरा मामला दर्ज हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने चार लाख रुपये में 60 गज का मकान राजदीप नाम के व्यक्ति से खरीदा था। इसके लिए उन्हें जीपीए भी बनाकर दी थी। अब उन्हें पता लगा है कि उन्हें फर्जी तरीके से निगम की जमीन बेच दी गई थी। पुलिस ने तीनों मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।