31 नवंबर, 2020: मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सरकार बल्लभगढ़ की निकिता तोमर हत्याकांड की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के लिए अर्जी देगी। साथ ही मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
01 नवंबर, 2020: बल्लभगढ़ के दशहरा मैदान में निकिता हत्याकांड को लेकर महापंचायत बुलाई गई। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों के साथ ही निकिता के परिजन भी उसमें मौजूद रहें।
02 नवंबर, 2020: नीमका जेल में बंद तौसीफ और रेहान की सुरक्षा बढ़ा दी गई। बैरक के बाहर स्थायी तौर पर वार्डन तैनात कर दिए गए।
06 नवंबर, 2020: विशेष जांच दल (एसआईटी) ने फरीदाबाद कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें एसआईटी ने हत्याकांड को सोची समझी और पूर्व नियोजित साजिश कहा।
10 नवंबर, 2020: हत्याकांड के तीनों आरोपियों को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के निर्देश पर अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी उपलब्ध करा दी गई। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 16 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई।
16 नवंबर, 2020: वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से तीनों आरोपियों को सुनवाई में शामिल किया गया। दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने फैसला अगले दिन तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
09 दिसंबर, 2020: निकिता के पिता मूलचंद तोमर, घायल अवस्था में निकिता को अस्पताल ले जाने वाले आकाश भाटिया और राजेश सैनी की गवाही पूरी होने के बाद कॉलेज के दो शिक्षक समेत दो पुलिसकर्मियों की भी गवाही पूरी हुई।
11 दिसंबर, 2020: तौसीफ के वकील अनीस खान ने पुलिस आयुक्त पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
19 दिसंबर, 2020: तौसीफ को हथियार उपलब्ध कराने वाले आरोपी अजरुदीन ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश सरताज बासवाना की अदालत में जमानत की याचिका लगाई है।
22 दिसंबर, 2020: आरोपी अजरुद्दीन की जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
06 जनवरी, 2021: तौसीफ के साथी रेहान की जमानत याचिका अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरताज बासवाना की अदालत ने खारिज कर दी।
12 जनवरी, 2021: फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट सहित पांच लोगों की गवाही हुई। इनमें चार पुलिसकर्मी शामिल थे।
22 जनवरी, 2021: हरियाणा हाईकोर्ट ने तौसीफ की निष्पक्ष जांच की मांग संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। तौसीफ ने याचिका में राजनीतिक रंजिश के चलते उसे फंसाने का आरोप लगाया था।
29 जनवरी, 2021: अदालत ने मुख्य आरोपी तौसीफ, उसके पिता जाकिर व मां असमीना को आरोप पत्र सौंप दिए।
02 फरवरी, 2021: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तौसीफ की नए सिरे से निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
09 फरवरी, 2021: एसआईटी ने 18 पेज का पूरक आरोप पत्र अदालत में पेश किया। इसमें 10 गवाह बनाए गए।
22 मार्च, 2021: न्यायाधीश सतराज बासवाना की फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के छह वकीलों के बीच करीब चार घंटे तक जमकर बहस हुई। दोनों ही पक्ष अपने आप को सही ठहराने की कोशिश में जुटे रहे।
24 मार्च, 2021: अदालत ने अजरुद्दीन को छोड़, तौसीफ और रेहान को दोषी करार दिया।
26 मार्च, 2021: तौसीफ और रेहान को अजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।