फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निकिता तोमर हत्याकांड: दो आरोपी दोषी करार, यहां पढ़ें पूरे मामले में कब क्या हुआ

Fri, 26 Mar 2021 04:24 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
निकिता तोमर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
फरीदाबाद में बीकॉम की मेधावी छात्रा निकिता तोमर की हत्या से पिछले साल पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। परिजनों के साथ-साथ पूरा देश निकिता के लिए इंसाफ मांग रहा था। अंकित बनकर निकिता से दोस्ती करने वाले तौसीफ ने एकतरफा प्यार में पागल होकर 26 अक्तूबर को सरेआम निकिता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 24 मार्च को न्याय की ओर पहला कदम उठा है। अदालत ने आज तीन में से दो आरोपी, तौसीफ और रेहान को दोषी करार दिया है। आइए शुरू से जानते हैं इस मामले में कब-कब क्या हुआ-
विज्ञापन


26 अक्तूबर, 2020: कॉलेज से परीक्षा देकर लौट रही निकिता को तौसीफ और उसके साथी ने पहले डराकर अपहरण करने की कोशिश की, लेकिन विफल होने पर गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।

26 अक्तूबर, 2020: लोगों का गुस्सा भड़कते देख पुलिस ने देर रात तौसीफ और रेहान को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही परिजनों को निकिता का शव भी सौंपा गया।
विज्ञापन


27 अक्तूबर, 2020: निकिता के पिता ने दावा किया कि आरोपी तौसीफ की मां उनकी बेटी निकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाती रहती थी। यह सिलसिला बीते दो वर्षों से चल रहा था।

29 अक्तूबर, 2020: हरियाणा सरकार ने नीकिता हत्याकांड की जांच लव जिहाद व जबरन धर्म परिवर्तन के दृष्टिकोण से कराने का फैसला लिया और मामले की जांच एसआईटी को सौंपी।

29 अक्तूबर, 2020: हरियाणा सरकार ने घोषणा की कि मामले की सुनवाई फास्ट्रैक कोर्ट में करवाई जाएगी और जल्द से जल्द कार्रवाई होगी।

29 अक्तूबर, 2020: तौसीफ ने फरीदाबाद की नीमका जेल की बजाय गुरुग्राम की भोंडसी जेल में जाने की अर्जी लगाई। वहीं निकिता की मां विजया तोमर, पिता मूलचंद तोमर व भाई नवीन तोमर को अलग अलग गनमैन मुहैया कराए गए। 
 
विज्ञापन

31 नवंबर, 2020: मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सरकार बल्लभगढ़ की निकिता तोमर हत्याकांड की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के लिए अर्जी देगी। साथ ही मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

01 नवंबर, 2020: बल्लभगढ़ के दशहरा मैदान में निकिता हत्याकांड को लेकर महापंचायत बुलाई गई। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों के साथ ही निकिता के परिजन भी उसमें मौजूद रहें।

02 नवंबर, 2020: नीमका जेल में बंद तौसीफ और रेहान की सुरक्षा बढ़ा दी गई। बैरक के बाहर स्थायी तौर पर वार्डन तैनात कर दिए गए।

06 नवंबर, 2020: विशेष जांच दल (एसआईटी) ने फरीदाबाद कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें एसआईटी ने हत्याकांड को सोची समझी और पूर्व नियोजित साजिश कहा। 

10 नवंबर, 2020: हत्याकांड के तीनों आरोपियों को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के निर्देश पर अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी उपलब्ध करा दी गई। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 16 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई।

16 नवंबर, 2020:  वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से तीनों आरोपियों को सुनवाई में शामिल किया गया। दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने फैसला अगले दिन तक के लिए सुरक्षित रख लिया।

09 दिसंबर, 2020: निकिता के पिता मूलचंद तोमर, घायल अवस्था में निकिता को अस्पताल ले जाने वाले आकाश भाटिया और राजेश सैनी की गवाही पूरी होने के बाद कॉलेज के दो शिक्षक समेत दो पुलिसकर्मियों की भी गवाही पूरी हुई।

11 दिसंबर, 2020: तौसीफ के वकील अनीस खान ने पुलिस आयुक्त पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 

19 दिसंबर, 2020: तौसीफ को हथियार उपलब्ध कराने वाले आरोपी अजरुदीन ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश सरताज बासवाना की अदालत में जमानत की याचिका लगाई है।

22 दिसंबर, 2020: आरोपी अजरुद्दीन की जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।

06 जनवरी, 2021: तौसीफ के साथी रेहान की जमानत याचिका अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरताज बासवाना की अदालत ने खारिज कर दी। 

12 जनवरी, 2021: फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट सहित पांच लोगों की गवाही हुई। इनमें चार पुलिसकर्मी शामिल थे।

22 जनवरी, 2021: हरियाणा हाईकोर्ट ने तौसीफ की निष्पक्ष जांच की मांग संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। तौसीफ ने याचिका में राजनीतिक रंजिश के चलते उसे फंसाने का आरोप लगाया था। 

29 जनवरी, 2021: अदालत ने मुख्य आरोपी तौसीफ, उसके पिता जाकिर व मां असमीना को आरोप पत्र सौंप दिए।

02 फरवरी, 2021: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तौसीफ की नए सिरे से निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

09 फरवरी, 2021: एसआईटी ने 18 पेज का पूरक आरोप पत्र अदालत में पेश किया। इसमें 10 गवाह बनाए गए।

22 मार्च, 2021: न्यायाधीश सतराज बासवाना की फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के छह वकीलों के बीच करीब चार घंटे तक जमकर बहस हुई। दोनों ही पक्ष अपने आप को सही ठहराने की कोशिश में जुटे रहे।

24 मार्च, 2021: अदालत ने अजरुद्दीन को छोड़, तौसीफ और रेहान को दोषी करार दिया।

26 मार्च, 2021: तौसीफ और रेहान को अजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें