अदालत ने कहा- आरोप गंभीर, गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। 22.50 लाख रुपये की ठगी के मामले में आरोपी महिला के खिलाफ पहले से दर्ज सात समान प्रकृति के आपराधिक मामलों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को आधार मानते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायालय, फरीदाबाद ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार ने 29 मई को यह आदेश सुनाया।
मामला सेक्टर-17 थाना में छह फरवरी 2024 को दर्ज एफआईआर से संबंधित है। शिकायतकर्ता मानसी कपूर ने आरोप लगाया था कि सितंबर 2023 में उनकी मुलाकात मुंबई निवासी पूनम चरणदास खन्ना से हुई थी। पूनम ने स्वयं को सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता और विभिन्न सरकारी एजेंसियों की कानूनी सलाहकार बताकर महाराष्ट्र हाउसिंग डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएचएडीए), यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (वायईआईडीए) और स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) में प्लॉट आवंटित कराने का भरोसा दिया।
शिकायत के अनुसार पूनम ने मंत्री और सांसद कोटा से प्लॉट दिलाने का झांसा देकर 22.50 लाख रुपये ले लिए। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी को 15 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपी के खिलाफ इसी प्रकार के सात अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। न्यायालय ने माना कि जमानत मिलने पर आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती है व गवाहों को प्रभावित कर सकती है। इन्हीं आधारों पर नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई।