संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर में इस बार बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। अलग-अलग विभागों से जुड़ीं शिकायतों के साथ-साथ राशन कार्ड, पेंशन, बिजली बिल और फैमिली आईडी में गड़बड़ियों के मामले ज्यादा देखने को मिले।
इसी दौरान शिव दुर्गा विहार निवासी विनीता ने बताया कि उनके पति का नाम राशन कार्ड से काट दिया गया है, जबकि उनका नाम बीपीएल सूची में दर्ज है। विनीता ने कहा कि उनके पति पैरालिसिस से पीड़ित हैं। ऐसे में परिवार का गुजर-बसर करना काफी मुश्किल हो गया है। वह अब तक दो बार समाधान शिविर के चक्कर लगा चुकी हैं।
पेंशन नहीं बनी, राशन कार्ड से नाम हटाया
शहदपुर विस्तार निवासी सुशीला ने बताया कि बिजली बिल अधिक आने के कारण उनकी पेंशन नहीं बन रही है। वह इस संबंध में पहले भी दो बार शिविर में आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। साथ ही बीपीएल सूची में नाम होने के बावजूद उनका राशन कार्ड से नाम हटा दिया गया है।
छह महीनों से उन्हें राशन नहीं मिल रहा
शिव दुर्गा विहार निवासी कविता ने बताया कि उनका नाम राशन कार्ड से काट दिया गया है, जिसके कारण पिछले छह महीनों से उन्हें राशन नहीं मिल रहा है। उनके पास एक साइकिल भी नहीं है, जबकि इनका नाम बीपीएल कार्ड में है। उन्होंने कहा कि वह इस समस्या को लेकर तीन बार समाधान शिविर में आ चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही दिया गया।
फैमिली आईडी में आय बढ़ने से परेशानी
सेक्टर-सात निवासी ममता ने बताया कि उनके पति मजदूरी करते हैं। पहले फैमिली आईडी में वार्षिक आय एक लाख 80 हजार दर्ज थी, जिसे अब बढ़ाकर तीन लाख कर दिया गया है। परिवार में छह सदस्य हैं और कमाने वाले केवल उनके पति हैं। वह पिछले दो महीनों से लगातार कमरा नंबर 11 के चक्कर लगा रही थी और अब समाधान शिविर में भी दो बार आ चुकी हैं। सुनवाई के दौरान उन्हें एक सप्ताह बाद वेरिफिकेशन के लिए दोबारा आने को कहा गया है।
तीन बार शिविर में आईं, हर बार आश्वासन
पर्वतीय कॉलोनी निवासी शीला ने बताया कि वह पिछले 13 साल से इस क्षेत्र में रह रही हैं। उनका नाम राशन कार्ड में करीब दो साल पहले जोड़ा गया था, जिसके बाद उन्हें लगभग एक वर्ष तक राशन मिला, लेकिन पिछले आठ महीनों से उनका नाम कार्ड से काट दिया गया है। उनके पति बीमार रहते हैं और परिवार में वह अकेली कमाने वाली हैं। वह तीन बार समाधान शिविर में आ चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है कि जल्द समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।