मुख्य गेट के आसपास असामाजिक तत्वों का लगा रहता है जमावड़ा, कई बार की जा चुके है शिकायत
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। धौज गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ में भय का माहौल है। अस्पताल परिसर और मुख्य गेट के आसपास असामाजिक तत्वों के जमावड़े से महिला कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्टाफ नर्स पूनम ने बताया कि वह पिछले 17 वर्षों से धौज पीएचसी में कार्यरत हैं। अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है और यहां कोई स्थायी सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति आसानी से अस्पताल परिसर में प्रवेश कर जाता है। स्टाफ का करना है कि पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि कौन मरीज के साथ आया है और कौन बाहरी व्यक्ति है। इससे अस्पताल में कार्यरत महिला कर्मचारियों को हर समय असुरक्षा का एहसास बना रहता है।
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उन्होंने बताया कि रात के समय कुछ लोग अस्पताल परिसर में पेड़ों के पीछे बैठकर शराब पीते हैं। जब स्टाफ उन्हें वहां से हटने के लिए कहता है तो वे गाली-गलौज पर उतर आते हैं। वहीं, शाम को ड्यूटी समाप्त होने के बाद जब महिला डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ घर के लिए निकलते हैं तो अस्पताल के गेट के बाहर बैठे असामाजिक तत्व उन पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं।
पूनम ने बताया कि अस्पताल परिसर में बने स्टाफ क्वार्टरों में रहने वाली महिला कर्मचारियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि कई बार शराब के नशे में लोग रात के समय क्वार्टरों के दरवाजे खटखटाकर भाग जाते हैं। इसके साथ ही गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसी घटनाओं से रात के समय डर और असुरक्षा का माहौल बना रहता है। मेडिकल ऑफिसर डॉ. यतेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल के बाहर असामाजिक तत्वों के जमावड़े की शिकायत पुलिस को मौखिक रूप से दी जा चुकी है। अब इस संबंध में लिखित शिकायत भी दी जाएगी।
अस्पताल में फिलहाल केवल एक ही सुरक्षा गार्ड है। पहले उसकी ड्यूटी रात के समय रहती थी, लेकिन वर्तमान में उसे दिन की शिफ्ट में लगाया गया है। अस्पताल के लिए दो अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड और एक सफाई कर्मचारी की मांग को लेकर उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।- डॉ. यतेंद्र कुमार, मेडिकल ऑफिसर, धौज पीएचसी