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अव्यवस्था के कारण लोगों पर संक्रमण का खतरा हावी

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फरीदाबाद बीके सिविल अस्पताल में कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए बैठी महिलाएं सामाजिक दूरी का नहीं ? - फोटो : Faridabad
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फरीदाबाद। संक्रमण को कम करने के लिए बेहतर योजना और रणनीति का दम स्वास्थ्य विभाग के दरवाजे पर ही दम तोड़ रहा है। बीके सिविल अस्पताल परिसर में जांच से लेकर रिपोर्ट मिलने तक की व्यवस्था चौपट है। अव्यवस्था के कारण संक्रमण का खतरा लोगों पर हावी हो रहा है। अस्पताल परिसर में आरटीपीसीआर जांच के समय लोगों के बैठने के लिए लगाई गई कुर्सियां चिपकी हुई हैं। जबकि जांच के दौरान रिपोर्ट के लिए लोगों की भीड़ ऐसे उमड़ पड़ रही है कि मानो कोरोना संक्रमण रोग ही न हो। व्यवस्था के अभाव में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के कार्यालय परिसर में ही कोरोना बचाव के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। ऐसे में अन्य सार्वजनिक व धार्मिक स्थल पर कोविड निमयों का पालन करने की उम्मीद बेमानी जान पड़ता है।
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बीते 11 दिनों में तीन गुना हुए अस्पताल में भर्ती मरीज
बृहस्पतिवार को जिले में सर्वाधिक 445 लोग संक्रमित मिले। इससे पूर्व 10 अप्रैल को 200 लोग, 09 अप्रैल को 268 मरीजों की पुष्टि हुई। जबकि 08 अप्रैल को 378 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इसी तरह अप्रैल के शुरुआती सप्ताह में ही संक्रमण का जोर दिखाई देने लगा था। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सात अप्रैल को 280 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इससे एक दिन पहले छह अप्रैल को 237 लोग संक्रमित मिले। बीते छह दिनों में ही जिले में 1808 नए मरीज मिल चुके हैं। संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज है कि मार्च माह के आखिरी दिन जिले में 581 उपचाराधीन मरीज थे। इसमें से 500 होम आइसोलेशन में रहे। वहीं, बीते 11 दिनों में रविवार तक जिले में 1946 मरीज उपचाराधीन रहे। इसमें से 267 जिले के अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं, 1679 का इलाज होम आइसोलेशन में किया जा रहा है। ऐसे में बीते 11 दिनों में ही जिले में अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या में तीन गुना इजाफा हुआ है। वहीं, संक्रमण ग्रस्त मरीजों का आंकड़ा लगभग चार गुना बड़ा है।
टीकाकरण केंद्र में सामाजिक दूरी के साथ नहीं कर सकते इंतजार
संक्रमण के कारण एक बार फिर से कोहराम मच गया है। जिले में लगातार मामले बढ़ रहे हैं। वहीं, वैक्सीनेशन के लिए आने वाले लोगों में भी सामाजिक दूरी न दिखना चिंता का विषय है। इसमें सर्वाधिक बुजुर्ग शामिल हैं। टीकाकरण केंद्र के बाहर बैठने के लिए की गई व्यवस्था में सामाजिक दूरी का ख्याल नहीं रखा गया है। ऐसे में साथ बैठना मजबूरी है। इससे सामाजिक दूरी न बनाना ही मजबूरी साबित हो रहा है।
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