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Faridabad News: आर्मेनिया की नेशनल पपेट संस्कृति ने पर्यटकों को लुभाया

Fri, 02 Feb 2024 10:59 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
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- विभिन्न प्रकार के धागों से शीप तैयार शिल्पकार हाथों से बनाते है कालीन, पर्स, राष्ट्रीय पोशाक, गुड़िया, झुमके
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में स्टॉल नंबर 26 पर आर्मेनिया की पपेट संस्कृति दिखी। इस संस्कृति ने पर्यटकों को खूब लुभाया। विभिन्न प्रकार के धागों से तैयार भेड़ के अलावा शिल्पकारों के हाथों बने कालीन, पर्स, राष्ट्रीय पोशाक, गुड़िया, झुमके आदि तैयार किए। मेले में पहुंचे पर्यटकों ने इन्हें खूब सराहा।
आर्मेनिया पश्चिम एशिया और यूरोप के काकेशस में स्थित एक पहाड़ी देश है। यहां अधिकांश अर्मेनियाई ईसाई हैं। क्राफ्ट आर्टिस्ट अर्बीना ने बताया कि आर्मेनिया हस्तकला के लिए प्रसिद्ध है। कालीन बनाना एक प्राचीन हस्तकला है जिसका अभ्यास वर्तमान में भी किया जाता है। यह कालीन चमकीले रंग और विभिन्न डिजाइन के होते हैं। अर्मेनियाई घरों में शौकिया तौर पर गलीचे और कालीन बिछाए जाते हैं। अर्बीना ने बताया कि देश की संस्कृति लेकर सूरजकुंड मेला पहुंची हैं,। इसमें हाथों से बनाई हुई कालीन, पर्स, राष्ट्रीय पोशाक, गुड़िया, टाई, गले का हार, झुमके, नेशनल पपेट और फोटो फ्रेम सहित अन्य चीजें शामिल है। इसके अलावा हाथ से बनाए हुए भेड़ (शीप) सबसे ज्यादा आकर्षक दिखाई दी।
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अलग-अलग रंगों के धागों से तैयार कालीन लोगों की बनी पहली पसंद
मेले में मौजूद क्राफ्ट आर्टिस्ट सुजाना और अनी ने बताया कि 4-5 घंटे में विभिन्न प्रकार के धागों से एक भेड़ (शीप) तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त नेशनल पपेट बनाने में 5-7 घंटे का समय लगता है। इनकी बुनाई सुई और मोटे धागे के माध्यम से की जाती है। धागे अलग-अलग रंग और प्रकार के इस्तेमाल किये जाते हैं, ज्यादातर लोगों की रूचि हस्तकला में है। वहीं आर्मेनिया की नेशनल पपेट संस्कृति को दर्शा रही है। इसकी कीमत 1000 रुपये है। सभी चीजों की कीमत 1000 से 1500 के बीच है।
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