संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने कथित अवैध भ्रूण लिंग जांच गिरोह से जुड़े आरोपी गौतम खान पचौरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं, उससे 16 हजार रुपये की बरामदगी अभी बाकी है और प्रभावी जांच के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। ऐसे में अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
मामला कोतवाली थाना में 25 मई 2026 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। आरोप है कि गौतम खान पचौरी गर्भवतियों का अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण कराने के लिए दलाल की भूमिका निभाता था। शिकायत के अनुसार गुरुग्राम की पीएनडीटी टीम ने एक डिकॉय गर्भवती महिला के माध्यम से कार्रवाई की। आरोप है कि पचौरी ने भ्रूण का लिंग बताने के लिए 36 हजार रुपये तय किए और रकम लेकर महिला को फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल भेजा, जहां सह-आरोपी डॉक्टर ओमप्रकाश ने अल्ट्रासाउंड कर गर्भस्थ शिशु का लिंग बताया। छापेमारी के दौरान 20 हजार रुपये बरामद कर लिए गए, जबकि शेष 16 हजार रुपये की बरामदगी अभी बाकी है।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि सह-आरोपी डॉक्टर ओमप्रकाश को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम अग्रिम जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर उसे भी राहत दी जाए। लेकिन अदालत ने कहा कि गौतम खान पचौरी पर डिकॉय ग्राहक से 36 हजार रुपये लेने और पूरे सौदे को संचालित करने के सीधे आरोप हैं। आरोपों की गंभीरता और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका तीन जुलाई को खारिज कर दी गई।