दशकों पुरानी लाइनों के भरोसे लोग, हल्की बारिश या सामान्य दिनों में भी कई इलाकों में सीवर ओवरफ्लो होना आम बात बना
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद का सबसे घनी आबादी वाला एनआईटी विधानसभा क्षेत्र वर्षों पुरानी सीवर व्यवस्था की वजह से गंभीर संकट झेल रहा है। जिस समय यहां सीवर लाइनें बिछाई गई थीं उस समय आबादी सीमित थी लेकिन बीते वर्षों में तेजी से बढ़ी आबादी, नए मकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और लगातार हुए शहरी विस्तार के कारण मौजूदा नेटवर्क अपनी क्षमता से कहीं अधिक दबाव झेल रहा है। नतीजा यह है कि हल्की बारिश या सामान्य दिनों में भी कई इलाकों में सीवर ओवरफ्लो होना आम बात बन चुकी है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब हरियाणा सरकार और नगर निगम फरीदाबाद ने पूरे एनआईटी क्षेत्र की सीवर व्यवस्था को नए सिरे से तैयार करने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। सभी वार्डों का तकनीकी सर्वे कराया जा रहा है ताकि भविष्य की आबादी को ध्यान में रखते हुए नया सीवर नेटवर्क तैयार किया जा सके।
हर वार्ड की क्षमता का होगा आकलन
नगर निगम ने निजी एजेंसी वेबकोर्स को सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी है। एजेंसी प्रत्येक वार्ड में घरों की संख्या, आबादी, मौजूदा सीवर लाइन का व्यास और उसकी वास्तविक क्षमता का आकलन कर रही है। इसके आधार पर तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में लाइनें बदलनी हैं और कहां बड़ी क्षमता की नई पाइप लाइन बिछानी होंगी। एनआईटी विधानसभा क्षेत्र के सभी नौ वार्डों का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर नगर निगम आयुक्त के माध्यम से शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजी जाएगी।
वर्कशॉप और डेयरियों ने बढ़ाई परेशानी
वार्ड-6 और वार्ड-7 में हालात सबसे अधिक खराब हैं। यहां बड़ी संख्या में वर्कशॉप और कुछ अवैध डेयरियों द्वारा सीवर लाइन में सीधे कनेक्शन जोड़ दिए गए हैं। डेयरियों का गोबर और अन्य ठोस अपशिष्ट सीवर में बहाने से लाइनें बार-बार चोक हो जाती हैं। इसके कारण आसपास की कॉलोनियों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या लगातार बनी रहती है।
मुख्य लाइन की सफाई भी नहीं दे सकी स्थायी राहत
इससे पहले फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने मुख्य 72 इंच सीवर लाइन की सफाई का अभियान कई महीनों तक चलाया था। इसके बावजूद अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी क्योंकि अंदरूनी कॉलोनियों की छोटी क्षमता वाली सीवर लाइनें पहले ही ओवरलोड हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्थानीय स्तर पर सीवर नेटवर्क की क्षमता नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक केवल मुख्य लाइन की सफाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।
आबादी के हिसाब से बदलेगा पूरा नेटवर्क
नगर निगम का मानना है कि इस बार केवल क्षतिग्रस्त लाइनें बदलने तक काम सीमित नहीं रहेगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पूरे नेटवर्क का पुनर्गठन किया जाएगा। जहां जरूरत होगी वहां बड़ी क्षमता की सीवर लाइनें बिछाई जाएंगी और अपशिष्ट जल के बेहतर प्रबंधन के लिए मिनी एसटीपी स्थापित करने की योजना भी तैयार की जाएगी।
एनआईटी के अधिकांश वार्डों से लगातार सीवर ओवरफ्लो की शिकायतें मिल रही हैं। इसी को देखते हुए निजी एजेंसी से सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद जिन क्षेत्रों में आबादी के हिसाब से लाइनें छोटी हैं, वहां बड़ी क्षमता की नई सीवर लाइनें बिछाई जाएंगी।
- धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त, नगर निगम फरीदाबाद
एनआईटी की सीवर समस्या प्रमुखता से उठाई थी। सरकार की मंजूरी के बाद अब सर्वे शुरू हो चुका है। उद्देश्य केवल अस्थायी मरम्मत नहीं बल्कि समस्या का स्थायी समाधान करना है। आवश्यकता वाले क्षेत्रों में मिनी एसटीपी स्थापित करने की भी योजना बनाई जाएगी।
- सतीश फागना, विधायक एनआईटी