भाई की जगह भाभी को मिले नौकरी
अमित मिलीटरी इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) में साल 2016 से दिल्ली कैंट में लिफ्ट मैकेनिक के पद पर कार्यरत थे। अमित की बहन श्वेता ने बताया कि घर में बुजुर्ग मां, भाभी सरिता, चार बच्चे और वो है। श्वेता भी प्राइवेट नौकरी करती हैं। घर की जिम्मेदारी भाई के कंधों पर थी। लेकिन अब इस हादसे ने परिवार पर दुखों का पहाड़ गिरा दिया है। परिवार अब आर्थिक संकट में है और पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग रखी है कि वे मृत्यु प्रमाण पत्र जल्द बनवाने में मदद करें। परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और अमित की जगह मेरी भाभी को नौकरी मिले।
मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा परिवार
अमित के जीजा अरविंद सिंह ने बताया कि चारों बच्चे 1 से 6 साल के हैं। ऐसे में अमित को मुखाग्नि भी उन्हें ही देनी पड़ी। रिश्तेदार मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फरीदाबाद नगर निगम ऑफिस गए थे। उन्होंने कहा कि डॉक्टर से लिखवाकर लाओ। डॉक्टर के पास गए तो बताया कि जहां मौत हुई, वहीं से बनेगा। ऐसे में अब सर्टिफिकेट के लिए प्रयागराज जाकर ही प्रयास करने होंगे।
कहीं से नहीं मिल रही मदद
अरविंद ने बताया कि 29 जनवरी की रात को ही अमित के सीनियर जेई को हादसे की सूचना दे दी थी। लेकिन अब तक एमईएस की ओर से कोई अधिकारी या सहकर्मी घर पर हाल जानने या सांत्वना देने तक नहीं आया है। अमित का विभाग, जिला प्रशासन कहीं से भी मदद नहीं मिल रही है।
सरकार से भी नहीं मिली मदद
श्वेता ने कहा कि अंतिम संस्कार के दौरान जिला प्रशासन की ओर से एक व्यक्ति आए थे। उन्होंने बताया कि वो हरियाणा सरकार की ओर से फरीदाबाद उपायुक्त ऑफिस से आए हैं। लेकिन उन्होंने भी अब तक कोई मदद या संपर्क हमसे नहीं किया है।
'30 से ज्यादा की हुई थी मौत'
अमित की भांजी ने बताया कि सरकार तो कह रही है कि वहां 30 मौतें हुई। लेकिन हादसे के दौरान जो हमारे परिवार ने देखा और सहा, वो कोई नहीं जानता। भगदड़ शांत होने के बाद देखा तो हर ओर लोग जमीन पर घायल गिरे थे। काफी लोग हिल भी नहीं रहे थे, जिससे साफ है कि उनकी मौत हो चुकी थी। सरकार जितनी मौतें बता रही है, असल में मरने वालों की संख्या उससे कई गुना अधिक है।