-भारतीय चिकित्सा परिषद ने नए प्रवेश पर हटाई रोक, ओपीडी को बेहतर करने में जुटा प्रबंधन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। छांयसा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के शैक्षणिक वर्ष 2023-24 के प्रवेश पर लगी रोक को भारतीय चिकित्सा परिषद ने हटा दिया है। एमबीबीएस के दूसरे बैच में 100 छात्रों को प्रवेश मिलेगा। दूसरी ओर कॉलेज प्रबंधन अस्पताल की ओपीडी समेत अन्य सुविधाओं को बेहतर करने में जुट गया है ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय 16 जुलाई 2022 को शुरू हुआ था। ओपीडी व मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए एक साल बीत चुका है, लेकिन अस्पताल में जांच सुविधाओं व दवाओं की कमी के कारण मरीजों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ। इसे देखते हुए भारतीय चिकित्सा परिषद ने नए प्रवेश पर रोक लगा दी थी। हरियाणा सरकार द्वारा दिए गए शपथ पत्र के बाद भारतीय चिकित्सा परिषद ने शैक्षणिक वर्ष 2023 - 24 में (प्रथम नवीनीकरण) और दूसरे बैच के लिए प्रवेश लेने की अनुमति दो दिन पहले दे दी है। इसकी सूचना परिषद के पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए कई प्रकार की जांच भी शुरू की जा रही हैं। साथ ही जूनियर डॉक्टर की नियुक्ति भी की जा रही है, जिससे मरीजों के साथ साथ मेडिकल कॉलेज को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।
सुविधा नहीं होने पर मरीज नहीं जा रहे
साल 2022 में 100 विद्यार्थियों ने मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। एक साल होने के बावजूद भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमानुसार कॉलेज को चलाया नहीं गया। इससे अस्पताल में मरीजों की संख्या में बढोत्तरी नहीं हुई। इस कारण एक माह पहले भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2023-2024 के द्वितीय बैच के लिए (प्रथम नवीनीकरण) एवं प्रवेश लेने की अनुमति के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया था। महाविद्यालय के निदेशक डॉ. गौतम गोले ने सरकार से छह महीने के लिए उपक्रम पत्र लेकर अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा देने की बात कही है।
27 जूनियर डॉक्टर रखने की तैयारी-
मेडिकल काॅलेज प्रबंधन अब नए सिरे से अस्पताल संचालन को लेकर तैयारी कर रहा है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए 27 जूनियर रेजिडेंट्स डॉक्टर की नियुक्ति भी करने की तैयारी चल रही है। यह नियुक्ति 3 से 5 जुलाई तक अस्पताल में साक्षात्कार के जरिए होगी। दूसरी और कई प्रकार के लैब व मशीनों को लगाया जा रहा है।
इसकी अभी जरूरत
1.अस्पताल में पहले सीवर शोधन संयंत्र लगा था। उसको अपग्रेड करने के लिए अप्लाई किया हुआ था। इसको लेकर 9 करोड़ रुपये भी जमा करवाए हुए हैं। अब एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) में तब्दील करने के लिए प्रदूषण विभाग को अप्लाई किया हुआ था, लेकिन दस्तावेजों में कमी के कारण फाइल को रिजेक्ट कर दिया गया।
2. कॉलेज व अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम में कई खामियां हैं। उन खामियों को विभाग दूर करने को कहा गया है। इसके बाद अस्पताल को एनओसी दी जाएगी।
मार्च 2020 में सरकार ने किया था टेकओवर
राज्य सरकार ने छांयसा के गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर को अधिग्रहित करके स्वयं चलाने का फैसला लिया। इसे लेकर कई संगठनों ने मुहिम चलायी थी। करीब 27.175 एकड़ जमीन पर बने कॉलेज को वित्तीय विवाद के कारण वर्ष 2018 में सील कर दिया था। सरकार ने कॉलेज का अधिग्रहण करने फैसला किया और सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सरकार ने कॉलेज का नाम अटल बिहारी मेडिकल महाविद्यालय कर दिया।