संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अभिभावक बेहद नाराज हैं। विभाग की ओर से जारी सूची में 887 वंचित वर्ग के बच्चों के नाम शामिल किए गए थे, लेकिन अब तक केवल 200 बच्चों को ही दाखिला मिल सका है। शेष बच्चों को प्रवेश न मिलने से अभिभावकों में गहरा असंतोष है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि दाखिला न देने वाले कई स्कूलों को बार-बार नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बावजूद बड़े निजी स्कूलों पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। जिले के करीब 27 स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक नामित बच्चों को प्रवेश देने में टालमटोल की है।
अभिभावकों का आरोप है कि बड़े स्कूलों की मनमानी बढ़ती जा रही है। जिन बच्चों का नाम आधिकारिक सूची में आ चुका है, वे अब भी प्रवेश से वंचित हैं। कई अभिभावक शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें अपने बच्चों को लेकर स्कूलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि कुछ बच्चों को प्रवेश के लिए अपने घर से चार किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है।
इस लापरवाही से गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक बोझ पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने भले ही गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का वादा किया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग हैं।
जिला शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यदि बड़े स्कूल इसी तरह नियमों की अनदेखी करते रहे तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी घोषणा की है कि इस मामले पर जल्द ही जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सख्त निर्णय लिए जाएंगे।
स्थानीय अभिभावक संगठन का कहना है कि आरटीई योजना गरीब बच्चों के भविष्य को बदलने का बड़ा अवसर है। इसकी अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
वर्जन
आरटीई के तहत एडमिशन न देने वाले स्कूल को बार-बार नोटिस जारी किया जा रहा लेकिन उनकी ओर से अभी तक जवाब नहीं आ रहा। जिसे देखते हुए स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं जा सकते हैं। शिक्षा विभाग जिला उपायुक्त संग दाखिले लिए बैठक जरूर करेगा। -अशोक कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी