आयोजकों के अनुसार, पिछले वर्षों में हवा चलने पर मिट्टी उड़ने से दुकानदारों का रखा सामान गंदा हो जाता था, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पहले से ही मिट्टी को गीला कर समतल किया जा रहा है। इसके साथ ही साफ-सफाई और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वहीं कुछ रास्तों में इंटरलॉकिंग टाइल बिछाकर पक्का किया जा रहा है।
31 जनवरी से 15 फरवरी तक चलने वाले इस मेले को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। मेले में देश-विदेश के शिल्पकार अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। विभिन्न देशों की सांस्कृतिक झलकियों से दर्शक रूबरू होंगे, जो मेले को और भी आकर्षक बनाएगा।
प्रशासन का दावा है कि इस बार दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि सूरजकुंड मेला एक बार फिर अपनी भव्यता और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए याद किया जाए।