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Faridabad News: कैंसर दवा कारोबारी आरोपी ने फरीदाबाद में खोले तीन अस्पताल

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रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में नहीं मिला लाइसेंस
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में डॉक्टरी का वैध लाइसेंस न मिलने पर अपराध की राह पकड़ने वाले डॉक्टर मनीष शर्मा का काला चिट्ठा अब परत-दर-परत खुलने लगा है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार किए गए सेक्टर-70 निवासी आरोपी मनीष को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है, ताकि फरीदाबाद से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले इस नेटवर्क की पूरी कड़ियों को जोड़ा जा सके।

जांच में सामने आया है कि आरोपी ने वर्ष 2010 में रूस से एमबीबीएस किया था। 2014 में भारत लौटने के बाद उसने प्रैक्टिस लाइसेंस के लिए अनिवार्य एफएमजीई परीक्षा तीन-चार बार दी थी लेकिन हर बार फेल होता रहा। भारत में चिकित्सा करने का लाइसेंस न मिलने के बावजूद उसने अवैध रूप से प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। रूस से लौटने के बाद आरोपी ने फरीदाबाद के जवाहर कॉलोनी (केएमसी अस्पताल), सेक्टर-55 और सोहना में तीन अलग-अलग अस्पताल खोले। हालांकि, मरीजों से इलाज के लिए ज्यादा रुपये लेने, फर्जी लैब टेस्ट के जरिए कमीशनखोरी और मनमाने बिल वसूलने जैसी गतिविधियों के कारण ये तीनों अस्पताल बंद हो गए। इसके बाद आरोपी ने फरीदाबाद में ही एचके पॉलीक्लीनिक और इंडियामार्ट पर पंजीकृत एचके फार्मास्युटिकल्स के जरिए तस्करी की दवाओं का ऑनलाइन नेटवर्क खड़ा कर लिया।
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पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी अमेरिका से आई गैर-मंजूरशुदा दवा इक्लूसिग और तुर्किये से तस्करी कर लाए गए ह्यूमन एल्ब्यूमिन जैसे महंगे कैंसर इंजेक्शनों की खरीद-फरोख्त कर रहा था। उसने ब्लड कैंसर के एक मरीज से 34 लाख रुपये मूल्य की दवा महज 40 हजार रुपये में खरीद ली थी। बरामद दवाओं पर लगे एमआरपी स्टिकर्स के फर्जी होने की आशंका में सैंपल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए हैं। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि तुर्किये और अमेरिका की ये दवाएं एयर या सी-रूट के जरिए किन ह्यूमन कैरियर्स की मदद से भारत लाई जा रही थीं।
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