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आरटीपीसीआर जांच के बाद ही ओपीडी में प्रवेश

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फरीदाबाद। कोरोना काल के बाद अब फरवरी माह में दांत रोग की ओपीडी 80 फीसदी मरीजों के साथ शुरू हो चुकी है। ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग अपनी परेशानी लेकर दंत रोग विशेषज्ञ के पास पहुंच रहे हैं। वहीं, डॉक्टरों ने अपीडी में सेवाएं शुरू तो कर दी हैं, लेकिन अब मरीजों के लिए आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य कर दी है। ऐसे में जो भी मरीज अपने दांत का इलाज करा रहा है। वह पहले कोरोना के रैपिड टेस्ट के बजाय आरटीपीसीआर जांच से होकर गुजर रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि बचाव ही कोरोना से सुरक्षा की गारंटी है। ऐसे में जरूरी है कि कोई भी कोरोना पीड़ित दांत की समस्या लेकर अस्पताल न पहुंचे।
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बीके सिविल अस्पताल की दंत रोग विभाग की एचओडी डॉ. वंदना ने बताया कि मरीजों का इलाज ओपीडी में शुरू कर दिया है। हालांकि कोरोना मुंह व लार से ज्यादा तेजी से फैलता है। ऐसे में आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य की गई है। हर दिन कोविड काल से पहले की तुलना में 80 फीसदी मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चे व बुजुर्ग ज्यादा हैं।
डॉ. वंदना ने बताया कि मरीजों की ओपीडी बढ़ने के साथ ही अस्पताल में दंत रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़ा दी गई है। अब अस्पताल में तीन दंत रोग विशेषज्ञ हैं। वहीं, सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में दो कक्ष में डेंटल (दांत) की ओपीडी चलाई जा रही है। ऐसे में मरीजों को परेशानी कम है।
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