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Faridabad News: मेहंदी वाले हाथों में सजी पूजा की थाली

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सोसाइटियों, सेक्टरों और कॉलोनियों में करवाचौथ की धूम, पति की लंबी उम्र के लिए रखा निर्जला व्रत
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। करवाचौथ पर बृहस्पतिवार को शहर की सोसाइटियों, सेक्टरों और कॉलोनियों में आस्था और उत्साह का माहौल रहा। सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ निर्जला व्रत रखा। दिनभर पूजा-पाठ और तैयारियों का दौर चला। रात को चांद के दीदार के बाद महिलाओं ने अर्घ्य देकर और पति का चेहरा देखकर व्रत खोला।

इस दौरान कई जगह महिलाओं ने सामूहिक रूप से करवाचौथ की कथा सुनी और मंगल गीत गाए। सुबह से ही घरों में पर्व की रौनक दिखाई दी। महिलाओं ने स्नान के बाद पूजा-अर्चना की और विधि-विधान से करवाचौथ की कथा सुनी। पारंपरिक परिधानों, मेहंदी और सोलह शृंगार में सजी महिलाओं ने त्योहार की खुशियों को खास बनाया। शाम होते ही मंदिरों और सोसाइटियों के पूजा स्थलों पर महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। कई स्थानों पर फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से मंदिरों को सजाया गया था।
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सेक्टर- 2, 3, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 15, 16, 31 और 37 के अलावा आगमन सोसाइटी, पुरी प्राणायाम, समर पाम, ओमेक्स, पुरी लैवेंडर, पीयूष हाइट्स, रॉयल हेरिटेज, ओजोन, एसआरएस रेजिडेंसी और एसआर पर्ल समेत कई आवासीय परिसरों में पर्व की धूम रही। कहीं सामूहिक पूजा हुई तो कहीं महिलाओं ने घरों में परिवार के साथ परंपरा निभाई।
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पतियों ने भी पत्नी के साथ रखा व्रत

बदलते समय के साथ करवाचौथ मनाने के तरीके में भी बदलाव देखने को मिला। कई परिवारों में पतियों ने भी पत्नी के साथ व्रत रखकर इस दिन को खास बनाया। महिलाओं ने कहा कि अब यह पर्व केवल परंपरा निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान का प्रतीक भी बन गया है। रात को चांद निकलने के बाद महिलाओं ने पूजा कर व्रत खोला। इसके साथ ही दिनभर से चल रहा उपवास और चांद के दीदार का इंतजार खुशियों में बदल गया।






करवाचौथ आस्था और परिवार से जुड़ा त्योहार है। पूरे दिन व्रत रखने के बाद चांद देखकर पूजा करने का अनुभव खास होता है।
- सीमा शर्मा, पुरी लैवेंडर सोसाइटी



इस त्योहार का इंतजार हर साल रहता है। परिवार के साथ पूजा करने और दूसरी महिलाओं से मिलने से खुशियां दोगुनी हो जाती हैं।
- ममता चौधरी, सेक्टर- 88



अब पति भी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं। इससे रिश्ते में आपसी समझ और सम्मान का भाव मजबूत होता है।
- प्रेरणा त्यागी, आगमन सोसाइटी



करवाचौथ की परंपरा परिवार के करीब लाती है। सजना-संवरना, कथा और चांद का इंतजार करना पर्व को यादगार बनाता है।
- प्रीति गुप्ता, डिस्कवरी पार्क सोसाइटी
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