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Faridabad News: महिला अधिवक्ता प्रधान पद पर भी चुनौती पेश करने उतरी चुनाव मैदान में

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अदालत
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बार चुनाव: महिला अधिवक्ता प्रधान पद पर भी चुनौती पेश करने उतरी चुनाव मैदान में
- प्रधान पद से लेकर कार्यकारिणी तक महिलाओं की दावेदारी, चुनौतियों के बीच बनाई पहचान

निधि कुशवाहा

फरीदाबाद। अदालत की चौखट पर न्याय की लड़ाई लड़ने वाली महिला अधिवक्ताएं अब अपनी पेशेवर पहचान के साथ नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ रही हैं। जिला बार एसोसिएशन के चुनाव में इस बार महिलाओं की भागीदारी केवल आरक्षित पदों तक सीमित नहीं है। प्रधान पद जैसे अहम पद पर भी दो महिला अधिवक्ताओं ने दावेदारी पेश की है। वर्षों से पेशे में आने वाली चुनौतियों का सामना करते हुए इन महिलाओं ने अपनी जगह बनाई है। अबकी बार निर्णय प्रक्रिया में भी भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

वकालत की शुरुआत से ही महिला अधिवक्ताओं के सामने कई तरह की चुनौतियां रहती हैं। अदालत में अपनी पहचान बनाना, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच जगह बनाना और पेशे के साथ अन्य जिम्मेदारियों को निभाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद महिला अधिवक्ताओं ने कदम पीछे नहीं खींचे। अब चुनाव में उनकी सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि वे बार से जुड़े फैसलों में भी अपनी आवाज को मजबूती से रखना चाहती हैं।
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अदालत की जिम्मेदारी के साथ चुनाव प्रचार भी

चुनाव नजदीक आते ही महिला प्रत्याशियों की दिनचर्या और व्यस्त हो गई है। दिन में अदालत में मुकदमों की पैरवी और पेशे से जुड़े काम निपटाने के बाद वे चुनाव प्रचार में जुट रही हैं। कई प्रत्याशी दिन के समय ही बार परिसर में अधिवक्ताओं के चैंबर तक पहुंचकर मुलाकात कर रही हैं। इसके अलावा व्यक्तिगत संपर्क के जरिए भी समर्थन मांगा जा रहा है। प्रचार के दौरान वे बार की सुविधाओं, अधिवक्ताओं की रोजमर्रा की दिक्कतों और महिला अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना पक्ष रख रही हैं।
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महिलाओं ने वकालत में अपनी मेहनत से पहचान बनाई है। अब नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने के लिए भी उन्हें आगे आना चाहिए। इसी सोच के साथ मैं चुनाव मैदान में हूं।
- नेहा शर्मा, अधिवक्ता

महिला अधिवक्ताओं की समस्याओं को सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनकी बात बार की कार्यकारिणी में मजबूती से रखी जाए। यही मेरी प्राथमिकता है।
- वंदना भाटी, अधिवक्ता
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महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तो समस्याओं का समाधान भी होगा। मैं इसी भागीदारी को मजबूत करने के लिए चुनाव लड़ रही हूं। महिलाओं के आगे आने से काफी कुछ बदलाव होगा।
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- कुसुम सरदाना, अधिवक्ता
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अधिवक्ताओं के लिए जरूरी सुविधाएं बेहतर हों। यह बेहद जरूरी है। पुस्तकालय की व्यवस्था को और उपयोगी बनाने के साथ अधिवक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देना चाहती हूं।
- रंजीता पटेल, अधिवक्ता

- निधि
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