वार्ड-28 के लोगों को मिलेगा सामाजिक आयोजनों के लिए अपना सार्वजनिक स्थल
एक साल में काम पूरा करने का लक्ष्य, स्थानीय लोगों को निजी आयोजन स्थलों पर निर्भरता से मिल सकती है राहत
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ओल्ड फरीदाबाद के वार्ड नंबर 28 स्थित अहेरिया बस्ती में नगर निगम की ओर से सामुदायिक चौपाल का निर्माण कराया जाएगा। चौपाल में पेयजल के लिए बोरवेल और सबमर्सिबल पंप, पानी की टंकी, बिजली, शौचालय, वाश बेसिन, कोटा स्टोन और टाइल्स की फर्श तथा छत पर वाटरप्रूफिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। नगर निगम की ओर से जारी कार्य आदेश के अनुसार निर्माण कार्य को 365 दिन में पूरा किया जाना है। चौपाल तैयार होने के बाद बस्ती और आसपास के लोगों को सामाजिक बैठकों और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध हो सकेगा।
अहेरिया बस्ती ओल्ड फरीदाबाद के पुराने आबादी क्षेत्र का हिस्सा है। आबादी क्षेत्रों में आबादी का घनत्व अधिक होने और खाली सार्वजनिक जमीन सीमित होने के कारण नई सामुदायिक सुविधाएं विकसित करना चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे इलाकों में चौपाल जैसे सार्वजनिक भवन की उपयोगिता केवल सामाजिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहती। स्थानीय बैठक, सामुदायिक चर्चा, छोटे सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों के लिए भी ऐसे स्थान उपयोगी साबित हो सकते हैं।
पेयजल और स्वच्छता की भी होगी व्यवस्था
प्रस्तावित चौपाल में पेयजल की सुविधा के लिए बोरवेल और 5 एचपी क्षमता के सबमर्सिबल पंप की व्यवस्था की जाएगी। पानी के भंडारण के लिए 1000 लीटर की टंकी भी प्रस्तावित है। इससे चौपाल में होने वाले आयोजनों के दौरान पानी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
भवन की छत पर वाटरप्रूफिंग का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य बारिश के दौरान छत से पानी रिसने की समस्या को रोकना है। फर्श पर कोटा स्टोन और टाइल्स का इस्तेमाल किया जाएगा। बिजली व्यवस्था में एलईडी लाइट, सीलिंग फैन और आवश्यक इलेक्ट्रिकल फिटिंग शामिल हैं।
चौपाल में शौचालय, यूरिनल और वाश बेसिन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। सार्वजनिक भवन के लिहाज से इन सुविधाओं का नियमित रखरखाव महत्वपूर्ण होगा। भवन तैयार होने के बाद सफाई, पानी, बिजली और छोटी-मोटी मरम्मत की व्यवस्था ठीक रही तो इसका उपयोग लंबे समय तक किया जा सकेगा।
निर्माण के साथ संचालन और रखरखाव भी चुनौती
सामुदायिक भवनों के निर्माण के बाद सबसे बड़ी चुनौती उनके नियमित रखरखाव की होती है। शहर में कई सार्वजनिक भवनों की उपयोगिता उनकी सफाई, बिजली, पानी और मरम्मत की व्यवस्था पर निर्भर करती है। ऐसे में अहेरिया बस्ती की चौपाल के लिए भी निर्माण पूरा होने के बाद संचालन और रखरखाव की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।
नगर निगम की तरफ से सड़कों व गलियों के विकास के साथ शहर की आवश्यक इमारतों पर भी काम किया जा रहा है। जल्द इस कार्य को भी पूरा कर लिया जाएगा। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त