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भारतीय थी मरने वाली चील

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डिवाइस लगे मृत पक्षी की मौत का कारण जानेगी डब्ल्यूआईआई
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फरीदाबाद। गांव भनकपुर में मंगलवार दोपहर मरा हुआ पाया गया पक्षी भारतीय आसमान में उड़ने वाली चील थी। भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून ने चीलों के प्रवास मार्ग का अध्ययन करने के लिए उस पर जीपीएस ट्रैकर लगा रखा था। डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक मृत चील की मौत का कारण पता लगाएंगे। बुधवार को देहरादून से आई दो वैज्ञानिकों की टीम चील के मृत शरीर को अपने साथ ले गए।
गांव भनकपुर में मंगलवार दोपहर एक ग्रामीण ने एक मरे हुए पक्षी की पीठ पर इलेक्ट्रानिक उपकरण लगा हुआ देखा था। इसके बाद अफवाह फैल गई कि पड़ोसी देश ने पक्षी पर जासूसी उपकरण लगाकर उसे भारत में छोड़ा था। मौके पर पहुंची वन्य संरक्षण टीम के एक निरीक्षक ने शुरूआती जांच में इसे बाज बताया था। धौज थाना प्रभारी और वरुण सिंघल (आईपीएस) ने बताया कि भारतीय वन्य जीव संस्थान ने मरे हुए पक्षी की पहचान चील के रूप में की। इसके बाद इसकी सूचना भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून को दी। डब्ल्यूआईआई केे वैज्ञानिकों ने पुलिस को बताया कि चील पक्षी के प्रवास मार्ग के पैटर्न का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए उसकी पीठ पर जीपीएस ट्रैकर लगाया गया था। चील के पंजे में छल्ला बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी की ओर से लगाया गया है। इस छल्ले में पक्षी की पहचान का विवरण कोड में अंकित रहता है।
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डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिकों के अनुसार चील संरक्षित पक्षी की श्रेणी में नहीं आती। भारत में चील काफी संख्या में हैं। वरुण सिंघल ने बताया कि बुधवार दोपहर डब्ल्यूआईआई के दो वैज्ञानिक फरीदाबाद पहुंचे और चील के शरीर को अपने कब्जे में लेकर देहरादून रवाना हो गएद्घ वहीं पर उसका पोस्टमार्टम कराया जाएगा। हालांकि प्रथम दृष्टया वैैज्ञानिक चील की मौत को प्राकृतिक मान रहे हैं, फिर भी अंत्यपरीक्षण कर मृत्यु का स्पष्ट कारण निश्चित किया जाएगा।
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