सांझी कला को बचाने के लिए संस्कृति विभाग का अनूठा प्रयास
फरीदाबाद। प्रदेश के कुरुक्षेत्र, करनाल, पलवल और फरीदाबाद जिलों में सबसे सुंदर सांझी बनाने वाली महिला को प्रथम पुरस्कार ग्यारह हजार रुपये नगद दिया जाएगा। सांझी कला को बचाने के लिए संस्कृति विभाग ने यह अनूठी पहल शुरू की है। इसके साथ ही द्वितीय पुरस्कार के रूप में 7100 और तीसरे पुरस्कार के रूप में 5100 रुपये दिए जाएंगे।
धरोहर हरियाणा संग्रहालय के प्रभारी एवं यूनिवर्सिटी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डा. महासिंह पूनिया ने कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सांझी कला को बढ़ावा देने के लिए इस सार्थक प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्कृति विभाग की धीरा खंडेलवाल और निदेशक महेश्वर शर्मा के नेतृत्व में यह सार्थक प्रयास कर रहा है। सांझी कला का संरक्षण उसी दिशा में एक सार्थक पहल है। नवरात्रों में लगाई जाने वाली सांझी वास्तव में हमारी संस्कृति का हजारों वर्ष पुराना पर्व है। वर्तमान दौर में आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव से सांझी कला गांवों में समाप्ति की कगार पर है। ऐसे में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग का यह प्रयास गांवों एवं शहरों में बची इस कला के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने बताया कि सांझी प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रतिभागियों को कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की मेल पर सूचना देनी होगी। उसके पश्चात कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग एवं निर्णायक मंडल के सदस्य गांवों में 10 से 17 अक्तूबर के बीच जाकर सर्वश्रेष्ठ सांझी को खोजने का काम करेंगे। इस प्रकार पुरस्कार प्राप्त करने वाली महिलाओं को हरियाणा सरकार की ओर से प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाएगा।