विद्यार्थी घंटों गीले फर्श पर बैठकर लेते रहे ज्ञान
फरीदाबाद। रेडक्रॉस चिन्ह के सदुपयोग और दुरुपयोग चर्चा में विद्यार्थी घंटों गीले फर्श पर बैठकर ज्ञान लेते रहे। जूनियर रेडक्रॉस और सेंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड अधिकारी रविंद्र मनचंदा और प्राचार्या नीलम कौशिक की अगुवाई में जागरूकता चर्चा का आयोजन किया। इस चर्चा में जागरूकता का पाठ पढ़ रहे बच्चों को बिना किसी सुविधा के ही गीले फर्श पर बैठाया गया।
जिला रेडक्रॉस के अध्यक्ष व उपायुक्त अतुल कुमार और सचिव श्यामसुंदर द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम में विद्यालय के जूनियर रेडक्रॉस के सदस्यों को बताया कि रेडक्रॉस के चिन्ह का दुरुपयोग करने पर जुर्माना हो सकता है। भारतीय संसद द्वारा मान्य 1960 के जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार रेडक्रॉस के चिन्ह के दुरुपयोग करने पर 500 रुपये जुर्माना और उस संपत्ति को भी जब्त किया जा सकता है। इसके अंतर्गत अस्पतालों, एंबुलेंस मेडिकल स्टोर, निजी वाहन या गाड़ी आदि पर इसे लगाने पर मनाही है। इन सभी के लिए अलग से चिन्ह बनाए गए हैं। रविंदर कुमार मनचंदा ने कहा कि जिनेवा कन्वेंशन के नियमों के मुताबिक रेडक्रॉस के चिन्ह का इस्तेमाल केवल संघर्ष या युद्ध की स्थिति में चिकित्सा कर्मियों और उन वाहनों के लिए किया जाता है। जिनमें चिकित्सा संबंधी सामग्री हो। यही कारण है की इस चिन्ह का इस्तेमाल केवल उन्हीं लोगों द्वारा होना चाहिए जो आधिकारिक रूप से इसके लिए चुने गये हों। इस चिन्ह का इस्तेमाल केवल सेना के चिकित्सक जवानों, अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस और रेड क्रिसेंट मूवमेंट के द्वारा ही किया जा सकता है अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस समिति की कोशिशों के बावजूद रेडक्रॉस के चिन्ह का गैर-कानूनी रूप से इस्तेमाल बदस्तूर जारी है। अपने क्लीनिक पर रेडक्रॉस के चिन्ह लगाए डॉक्टरों को न पता है और न डर है की ये उन्हें मुसीबत में डाल सकता है। विद्यालय के अंग्रेजी प्रवक्ता रविन्द्र कुमार मनचंदा ने बच्चों को कहा कि यदि कहीं भी रेडक्रॉस के चिन्ह का दुरुपयोग होता देखें तो उस की फोटो ख़ींच कर विद्यालय में दें, उस फोटो व स्थान को उचित माध्यम से जिला रेडक्रॉस तक पहुंचाएंगे। ताकि दोषियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जा सके। लेकिन ये ज्ञान ले रहे बच्चों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया कि वे गीले फर्श पर बैठकर उनकी महत्वपूर्ण बातें सुनने को मजबूर हैं।