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नएचएम हड़ताल में तड़प रही गर्भवतियां, एक की मौत

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तड़पती रही गर्भवती, नहीं मिला इलाज, मौत
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फरीदाबाद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान (एनएचएम) के तहत कार्यरत कर्मचारियों की 5 फरवरी से लगातार जारी हड़ताल अब जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवा साबित हो रही है। शनिवार को जहां एक महिला की आटो में हुई डिलीवरी के बाद बच्चे की मौत हो गई थी, वहीं रविवार को समय से इलाज न मिल पाने के कारण नंगला गांव में एक प्रसूता की मौत हो गई। हालांकि, घर पर ही हुई इस डिलीवरी में बच्चा सुरक्षित है। उधर, बल्लभगढ़ स्थित जच्चा-बच्चा केंद्र पर ताला लगा होने के कारण एक गर्भवती की डिलीवरी केंद्र परिसर में ही बनी झोपड़ियों में स्थानीय महिलाओं द्वारा कराई गई।
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल में जिले के 660 स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हैं। ज्यादातर की तैनाती ग्रामीण तबके के स्वास्थ्य केंद्रों पर है। हड़ताल के कारण यह स्वास्थ्य केंद्र अब बंद पड़े हैं। यही कारण है कि रविवार को नंगला निवासी निर्मला (25) की प्रसव के दौरान इलाज न मिलने से मौत हो गई। निर्मला को रविवार दोपहर प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उसे पास ही स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर गए, मगर वहां ताला लगा होने के कारण वापस घर आ गए। इसके बाद घर ही पर निर्मला की डिलीवरी कराई गई। निर्मला ने लड़के को जन्म दिया, मगर उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। इसके बाद परिजन उसे लेकर बीके सिविल अस्पताल पहुंचे, मगर तब तक निर्मला की मौत हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार एंबुलेंस बुलाने को फोन किया था, मगर कोई जवाब नहीं मिला। निर्मला की सास सुशीला ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वह बहू को निजी अस्पताल ले जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।
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स्वास्थ्य केंद्र पर ताला, परिसर में हुई डिलीवरी
दूसरी ओर प्रसूता स्वास्थ्य सुविधा न मिलने की ऐसी ही एक दूसरी घटना शनिवार रात को हुई। बल्लभगढ़ स्थित जच्चा-बच्चा केंद्र परिसर में बनी झोपड़ी में ही ममता नामक महिला की डिलीवरी कराई गई। ममता का परिवार स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ही झोपड़ी बनाकर रहता है। ममता के पति भागीरथ ने बताया कि वह पत्नी को तड़पता देख लगातार एंबुलेंस नंबर पर फोन लगाते रहे, लेकिन फोन नहीं लगा। उधर एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य केंद्र पर भी ताला लटका था। ऐसे में पड़ोस में रहने वाली महिलाओं ने ममता की डिलीवरी में मदद की। भागीरथ ने बताया कि घटना का पता लगा तो सुबह एक महिला रोग विशेषज्ञ ने ममता की जांच की और बीके ले जाने को कह दिया। बीके अस्पताल में भी स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलने के डर से ममता अपने नवजात के साथ अपनी मां के पास मथुरा चली गई।

कोट
लोगों की परेेशानी को देखते हुए सभी जच्चा-बच्चा केंद्रों पर डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की तैनाती की जाएगी। सोमवार से ही इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए डिप्टी सीएमओ को निर्देशित कर दिया गया है।
- डा. गुलशन अरोड़ा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

दावा, मिल रही हैं एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधाएं, मगर यह है हकीकत:
स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो सभी स्वास्थ्य सुविधाएं सामान्य हैं। किसी को भी असुविधा नहीं है। जबकि अफसरशाही के इन दावों की सच्चाई खुद उन्हीं के स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड बयां कर रहे हैं।
- 6 फरवरी को 7 लोगों को ही एंबुलेंस सुविधाएं मिली।
- 7 फरवरी को 2 लोगों को एंबुलेंस सुविधाएं मिली।
- 8 फरवरी को 2 लोगों को एंबुलेंस सुविधाएं मिली।
- 9 फरवरी को 2 लोगों को एंबुलेंस सुविधाएं मिली।
- 10 फरवरी दोपहर 2 बजे तक केवल एक व्यक्ति को ही एंबुलेंस सुविधा मिली
जबकि आम दिनों में यह आंकड़ा 30 से 50 लोगों का होता है।

हड़ताल में गिर रहा महिला डिलीवरी ग्राफ
औसतन हर माह बीके सिविल अस्पताल में 650 डिलीवरी का ग्राफ एनएचएम हड़ताल के दौरान काफी नीचे आ गया है। हड़ताल के दिन यानि पांच फरवरी को अस्पताल में 21 डिलीवरी हुई। अगले दिन 15, फिर सात फरवरी को 18, आठ फरवरी को 18 और नौ फरवरी को 23 डिलीवरी अस्पताल रिकॉर्ड में दर्ज हैं। वहीं 10 फरवरी यानी रविवार दोपहर तक 10 ही महिलाओं की डिलीवरी हुई। अमूमन रेफरल केस के साथ यह आंकड़ा करीब 25 से 30 डिलीवरी का होता है। जबकि हड़ताल के कारण ज्यादातर प्रसूताएं या तो अस्पताल पहुंच नहीं पा रही हैं या फिर निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं। इसके अलावा जच्चा-बच्चा केंद्रों डिलीवरी का यह आंकड़ा बिल्कुल शून्य हो चुका है। ऐसे में फरीदाबाद में जननी सुरक्षा योजना बदहाल हो रही है।
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सांसद-विधायक आवास पर प्रदर्शन की तैयारी
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल लंबी चलने के आसार हैं। कर्मचारी नेताओं की माने तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है। रविवार को भी धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना था कि अगर सोमवार तक उनकी मांगों को नहीं माना गया तो मंगलवार को सभी स्थानीय सांसद और विधायकों के आवास पर दुपहिया वाहनों पर प्रदर्शन किया जाएगा।
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