पुलिस अफसर के बेटे सहित छह ने लूटे थे करोड़ों के हीरे, दोषी करार
फरीदाबाद। पंजाब के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विजिलेंस शिवकुमार शर्मा के बेटे मोहित शर्मा व उसके गनर हवलदार हरबंस लाल सहित छह लोगों ने करीब दस साल पहले फिल्लौर, पंजाब में करोड़ों रुपये के हीरे लूटे थे। फरीदाबाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक गुप्ता ने आरोपियों को डकैती के मामले में दोषी करार दिया है। छह जुलाई को अदालत में सजा पर बहस होगी और उसी दिन फैसला भी आ सकता है। करीब पांच साल तक मामले की सुनवाई पंजाब की स्थानीय कोर्ट में चली। इस दौरान पीड़ित पक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाकर मामले को पंजाब से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की थी। इस पर अदालत ने मामले को फरीदाबाद की अदालत में भेज दिया था।
लुधियाना, पंजाब के फिल्लौर थाने में 9 अक्टूबर 2008 को दर्ज कराए गए मामले में भोखेवाला, मुंबई निवासी भावेश शाह ने बताया कि वह मुंबई स्थित हीरों का कारोबार करने वाली महेंद्रा ब्रदर्स एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्यरत हैं। भावेश के अनुसार 9 अक्टूबर 2008 को वह हीरे के 45 पैकेट लेकर लुधियाना के फाउंटेन चौक स्थित एम. ज्वैलर्स नामक शोरूम पर पहुंचे। इसके मालिक मोहित शर्मा हैं। हीरों की कीमत करीब 4.15 करोड़ रुपये थी। भावेश ने मोहित शर्मा को हीरे दिखाए, मगर उन्होंने कुछ नहीं लिया। लुधियाना से उन्हें अमृतसर जाना था, इसलिए मोहित ने टैक्सी स्टैंड से किराए पर टैक्सी करवा दी।
सोची समझी साजिश के तहत रास्ते में फिल्लौर के पास टैक्सी चालक ने लघुशंका के लिए गाड़ी रोक दी। इसी दौरान कुछ युवक आए और उनकी आंखों पर मिर्च झोंकने के साथ ही उसे पीटना शुरू कर दिया। बदमाशों ने उन्हें कार से उतारकर उनकी जांघ सहित कई स्थानों पर चाकू से भी हमला किया और हीरों के पाउच लूटकर ले गए। फिल्लौर पुलिस ने मामला दर्ज कर मामले की जांच की। पुलिस जांच के दौरान मोहित शर्मा पर शक हुआ और 11 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में मोहित ने अपने गनर हवलदार हरबंस लाल के साथ मिलकर हीरे लूटने की योजना बनाने की बात कबूल की। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर लूटे गए हीरे भी बरामद कर लिए थे। वारदात में इन दोनों के अलावा सिपाही अमरदीप, मोहम्मद मेहरबान, सुरेश कुमार, सुखदेव सिंह, भूपेंद्र सिंह, अशोक कुमार और गुरदयाल को भी आरोपी बनाया गया था। जांच में सामने आया कि गाड़ी में भावेश शाह पर सुरेश कुमार, अशोक कुमार और मेहरबान ने हमला किया था।
करीब पांच साल तक यह मामला पंजाब की स्थानीय अदालत में चला, मगर बाद में पीड़ित पक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाकर मामले को पंजाब से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की। वादी का कहना था कि मोहित शर्मा के पिता पुलिस अधिकारी हैं। ऐसे में वह मामले के गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इस पर अदालत ने 2013 में यह मामला फरीदाबाद की अदालत में स्थानांतरित कर दिया। अदालत ने इस मामले में मोहित शर्मा, मोहम्मद मेहरबान, हरबंस लाल, सुरेश कुमार, भूपेंद्र सिंह और अशोक कुमार को दोषी करार दिया है, जबकि सिपाही अमरदीप, सुखदेव और गुरदयाल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत में छह जुलाई को सजा पर बहस होगी और फैसला सुनाया जाएगा।