शांतिपूर्ण रहा माहौल तो पुलिस ने ली चैन की सांस
फरीदाबाद। सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से वायरल हो रहे भारत बंद के आह्वान के चलते मंगलवार को पुलिस पूरी तरह से चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रही। दो अप्रैल को दलित वर्ग के आरक्षण में बदलाव को लेकर हुए भारत बंद के दौरान हुए उपद्रव से सबक ले पुलिस इस बार किसी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहती थी। मंगलवार सुबह से ही शहर के सभी प्रमुख चौराहों के साथ रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी पुलिस का कड़ा पहरा था। रेलवे स्टेशन पर जीरआरपी व आरपीएफ ने संयुक्त रूप से सर्च अभियान चलाया। शाम को सब कुछ शांति से निपटने पर पुलिस ने राहत की सांस ली।
अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी एक्ट) अधिनियम में संशोधन के विरोध में गत दो अप्रैल को दलित संगठनों की ओर से भारत बंद के दौरान हुई आगजनी, पथराव व ट्रेनों में तोड़फोड़ के तत्काल बाद ही सोशल मीडिया पर आरक्षण के विरोध में 10 अप्रैल को बंद के आह्वान का मेसेज वायरल हो रहा था। हालांकि, इन संदेशों पर न तो किसी व्यक्ति और न ही संगठन के बारे में लिखा था कि आखिर बंद का आह्वान कौन कर रहा है।
इसी के चलते इसे अफवाह माना जा रहा था। इसके बावजूद पुलिस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। यही कारण रहा कि सोमवार रात को ही पुलिस जवानों की ड्यूटी लगा दी गई थी। डीसीपी एनआईटी, सेंट्रल व बल्लभगढ़ के नेतृत्व में अलग-अलग रिजर्व का गठन किया गया था। साथ ही शहर के सभी प्रमुख चौक चौराहों, रेलवे स्टेशन व बस अड्डों पर पुलिस तैनात कर दी गई थी। शहर में लगी महापुरुषों की मूर्तियों पर भी पुलिसकर्मी लगाए गए थे, ताकि कोई इन मूर्तियों को नुकसान पहुंचाकर शहर में शांति व्यवस्था को न बिगाड़ सके। सारा दिन पुलिस सतर्क रही। इस दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना, प्रदर्शन या जाम की सूचना नहीं आने से पुलिस ने शाम को राहत की सांस ली।
नाके लगाकर की चेकिंग, काटे चालान
भारत बंद के दौरान सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में नाकेबंदी कर वाहनों की जांच के भी आदेश दिए गए थे। इस पर थाना क्षेत्रों के अलावा यातायात पुलिस ने भी जगह-जगह नाकेबंदी कर वाहनों की जांच की। इस दौरान पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करवाने वालों के चालान भी किए।