अरावली के 52 एकड़ क्षेत्र में फिर लौटेगी हरियाली
फरीदाबाद। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अरावली में स्थित 52.299 एकड़ जमीन को मानद (डीम्ड) वन घोषित करने से भारती एयरटेल की समूह आवासीय परियोजना को झटका लगा है। पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि डीम्ड वन घोषित होने के बाद यहां कंपनी की आवास योजना नहीं बनेगी और इस क्षेत्र में दोबारा हरियाली लौटेगी। प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे सेव फरीदाबाद के सदस्यों ने अब सड़क के किनारे लगाई गई ऊंची अस्थाई दीवारों को हटाने की मांग की है ताकि क्षेत्र में दोबारा पौधरोपण कर उसे हरा भरा किया जा सके।
पर्यावरण प्रेमी सुनील हरसाना बताते हैं कि फरीदाबाद में अरावली की 9008 हेक्टेयर जमीन है। इसमें मात्र 4 हजार एकड़ जमीन ही पीएलपीए के तहत संरक्षित है। अरावली की बाकी जमीन की हरियाली समाप्त कर इसका अंधाधुंध इस्तेमाल किया जा रहा है। भारती एयरटेल को सरकार ने सराय ख्वाजा स्थित अरावली में 52.299 एकड़ जमीन आवासीय परियोजना के लिए दी थी। पीएलपीए में शामिल नहीं होने के कारण सरकार ने इसे वन क्षेत्र नहीं माना था। वह कहते हैं कि फरीदाबाद में अरावली की 5 हजार हेक्टेयर जमीन को संरक्षित करने की जरूरत है। एनजीटी का यह आदेश पीएलपीए से बाहर की अरावली को बचाने में बहुत मदद करेगा।
पर्यावरण प्रेमी आरती खुराना बताती हैं कि भारती एयरटेल प्रोजेक्ट के लिए इस जमीन से सात हजार पेड़ काट डाले गए थे। एनजीटी ने इसे डीम्ड वन घोषित किया है इसलिए जरूरी है कि यहां दोबारा बड़ी मात्रा में पौधरोपड़कर इसकी हरियाली लौटाई जाए। पर्यावरण प्रेमी जितेंद्र शर्मा कहते हैं कि भारती एयरटेल ने अपने क्रियाकलाप छिपाने के लिए 52.299 एकड़ जमीन को चारों ओर से अस्थायी ऊंची दीवारों से घेर रखा है। उनका आरोप है कि दीवारों के भीतर उगने वाली वनस्पति को योजनाबद्ध ढंग से काटा जाता है ताकि सेटेलाइट चित्र में इस क्षेत्र में हरियाली नहीं नजर आए।
पर्यावरण प्रेमी विष्णु गोयल कहते हैं कि एनजीटी ने अरावली में स्थित भारती एयरटेल प्रोजेक्ट को यह कह कर खारिज कर दिया कि वह इलाका डीम्ड वन क्षेत्र है। उनका आरोप है कि अनखीर का इलाका तो पूर्णतया पीएलपीए में आता है लेकिन वहां एक पांच सितारा होटल धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। एक कथित सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले को एनजीटी में लेकर गया लेकिन जब कार्रवाई की नौबत आई तो उसने एनजीटी से केस ही वापस ले लिया। सेव फरीदाबाद के सदस्यों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को ईमेल कर भारती एयरटेल प्रोजेक्ट में खड़ी की गईं अस्थायी ऊंची दीवारें हटवाने की मांग की है। सदस्यों का कहना है कि दीवार हटने से इस क्षेत्र में उग रही वनस्पति और पौधरोपण की निगरानी की जा सकेगी।