- 75 वर्ष आयु पार कर चुके पेड़ों का किया गया चयन, 2500 रुपये प्रति वर्ष मिलेगी पेंशन
- पेंशन पाने के लिए 22 निजी तथा 44 पंचायत, मंदिर समिति व सरकारी स्कूलों को मिलेगी पेंशन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हरियाणा प्राण वायु देवता पेंशन योजना के लिए जिले में 56 पेड़ों का चयन किया गया है। ये वे पेड़ हैं जो 75 वर्ष से अधिक पुराने हैं। चयनित किए गए इन पेड़ों को सरकार द्वारा 25 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से पेंशन राशि दी जाएगी। जिले में इस योजना के तहत जहां 22 निजी लोगों को पेंशन राशि मिलेगी, वहीं पंचायत, मंदिर समिति तथा सरकारी स्कूलों के खाते में पेंशन राशि जमा होगी।
सरकार की इस योजना का लाभ जिले में ज्यादा से ज्यादा मिल सके, उसके लिए जिला प्रशासन तथा वन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। प्रयासों के चलते ही 56 पेड़ों का चयन किया जा चुका है। प्रशासन ने लोगों से इस योजना का लाभ लेने के लिए 75 साल से ज्यादा लगे पेड़ों की सूची देने के लिए अपील की जा रही है। साथ ही जो पेड़ चयनित किए गए हैं, यदि वे गलत हैं तो उनके लिए भी आपत्ति मांगी गई है।
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यह है हरियाणा प्राण वायु देवता पेंशन योजना
सरकार द्वारा शुरू की गई योजना के तहत 75 साल से अधिक उम्र के पेड़ों की देखभाल और परवरिश करने वालों को 2500 रुपये प्रति वर्ष पेंशन दी जाएगी। साथ ही वृद्धावस्था पेंशन की तरह समय-समय पर यह पेंशन राशि बढ़ाई जाएगी। यह राशि सीधा लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा की जाएगी। पेड़ों के लिए इस प्रकार की योजना लागू करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है।
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क्या है पेंशन पाने के लिए नियम
योजना के तहत यदि किसी व्यक्ति के घर या स्वयं की जमीन पर 75 साल या उससे ज्यादा की उम्र का पेड़ है तो वो अपने संबंधित जिले के वन विभाग कार्यालय में जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद एक समिति द्वारा उस आवेदन का आकलन किया जाएगा। सत्यापन उपरांत सभी शर्तें पूरी पाई जाती हैं तो लाभार्थी व्यक्ति को पेड़ों से मिलने वाली पेंशन दी जाएगी।
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चयनित किए गए पेड़ों पर विरोध होने पर की जा सकती है आपत्ति
उपायुक्त विक्रम सिंह का कहना है कि वन विभाग के पास 75 साल से अधिक आयु वाले पेड़ों को पेंशन देने संबंधित जो आवेदन हैं, उन पर यदि किसी का विरोध हैं कि वह आवेदन गलत है तो उसके खिलाफ आपत्ति दी जा सकती है। 15 दिन के अन्दर सूचियों के निरीक्षण उपरांत आपत्ति लिखित में दी जा सकती है।