डेढ़ साल में 93 हजार से अधिक आवेदन आए, लगभग 41,500 को ही मिला लाभ
अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से लंबित पड़े हैं हजारों आवेदन
गौरव मिश्रा
फरीदाबाद। कर्मचारियों और उनके बच्चों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ पाने के लिए पात्रों को संघर्ष करना पड़ रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण आवेदनों का सही समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है और हजारों आवेदन सरकारी योजनाओं का लाभ पाने से वंचित चल रहे हैं। हालत यह है कि 2025 से सितंबर 2026 तक इन योजनाओं के लिए 93 हजार से अधिक आवेदन आए, लेकिन करीब 41,500 आवेदकों को ही लाभ मिल पाया है।
हरियाणा श्रमिक कल्याण बोर्ड के आंकड़ों पर नजर डाले तो आवेदन करने वालों में लगभग 51,500 आवेदकों को अब तक योजना का लाभ मिलने का इंतजार है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से विभाग में बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों के पद खाली हैं। जिसके कारण आवेदनों पर कार्रवाई करने में समय लग रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 69 हजार से अधिक आवेदन आए थे। इनमें से करीब 29 हजार लोगों को ही लाभ मिल सका। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती छह महीनों में 23 हजार से अधिक आवेदन आ चुके हैं। इनमें से 12,051 आवेदकों को ही योजनाओं का लाभ मिला है।
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डेढ़ साल में 81 करोड़ रुपये की सहायता दी
जिला श्रमिक कल्याण अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में विभिन्न योजनाओं के तहत कर्मचारियों को करीब 81 करोड़ रुपये की राशि दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि सभी पात्र कर्मचारियों और उनके बच्चों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। हालांकि, अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण आवेदनों के निपटारे में देरी हो रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में अधिकारियों की संख्या अधिक होने के कारण एक साल में ही 70 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई थी। इसके मुकाबले पिछले डेढ़ साल में करीब 81 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।
श्रमिक कल्याण बोर्ड की प्रमुख योजनाएं और सहायता राशि
हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड की ओर से श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें छात्रवृत्ति 10,000 से 21,000 रुपये, कन्यादान 51,000 रुपये, प्रसूति सहायता लड़का होने पर 12,000 और लड़की होने पर 15,000 रुपये, साइकिल के लिए 5,000 रुपये, सिलाई मशीन के लिए 4,500 रुपये और दाह संस्कार के लिए 15,000 रुपये की सहायता शामिल है। दिव्यांग बच्चों को 30,000 रुपये तक मिल सकते हैं।