बल्लभगढ़। बसों के मामले में शहर के रोडवेज की हालत खस्ताहाल बनी हुई हैं। स्थिति ऐसी है कि 76 बसों में से 40 बसें खराब होने की कगार पर पहुंच गई। उधर, विभाग भी बसों की मरम्मत या किसी और इंतजाम के बजाय धड़ल्ले से बसों को दौड़ाने में लगा है।
बल्लभगढ़ रोडवेज बस डिपो से प्रदेश में कई लंबे रूटों की बसें संचालित होती हैं। एनआईटी बस अड्डा अभी निर्माणाधीन है। ऐसे में रोडवेज के बेडे़ में शामिल सभी बसों का रखरखाव बल्लभगढ़ से किया जा रहा है। वहीं, जिले की ज्यादातर बसों का संचालन बल्लभगढ़ पर ही निर्भर है। हालत ऐसे हैं कि रोडवेज के पास कुल 76 बसों में से 40 अब खराब होने की कगार पर हैं।
शहर की आबादी और लोगों की आवाजाही से अनुसार रोडवेज में 300 बसों की जरूरत महसूस होती है। बसों की कमी और अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोग निजी बसोें के भरोसे सफर करने को मजबूर हैं। वहीं, निजी बस संचालक भी लोगों की मजबूरी का फायदा उठा मनमाना किराया वसूलने में जुटे हैं। हालांकि विभाग ने किलोमीटर स्कीम के तहत 25 बसें लगा रखी हैं।
रोडवेज संघ के प्रधान रविंद्र नागर ने बताया कि जरूरत के अनुसार किलोमीटर स्कीम की बसें संचालित की जाती हैं। वहीं, दैनिक यात्रियों का आरोप है कि स्कीम की अधिकांश बसें रोडवेज के बस अड्डे से बाहर ही नहीं निकलती।
वर्जन-
रोडवेज में कुछ बसों की हालत खराब है। उनकी मरम्मत का काम चल रहा है। रोडवेज में बसों की कमी नहीं है। - राजीव नागपाल, महाप्रबंधक जिला रोडवेज