दो हजार से अधिक लोगों की महापंचायत में कानूनी लड़ाई का फैसला, एनजीटी में केस दायर
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रविवार सुबह ग्रामीणों ने कूड़े से भरे नगर निगम के वाहनों को डंपिंग यार्ड में जाने से रोक दिया ग्रामीणों का आरोप, पुलिस ने धरनास्थल पर जाने से रोका, पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी और हाथापाई
अमर उजाला ब्यूरो फरीदाबाद। गांव भांखरी में प्रस्तावित कूड़ा निस्तारण केंद्र के विरोध में रविवार को ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया। दो हजार से अधिक लोगों की महापंचायत में कूड़ा डालने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने और आंदोलन जारी रखने का फैसला किया।वहीं, रविवार सुबह ग्रामीणों ने कूड़े से भरे नगर निगम के वाहनों को डंपिंग यार्ड में जाने से रोक दिया। जिसके बाद फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। हालात को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। तनाव के बीच टकराव की आशंका बनी रही।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें धरनास्थल पर जाने से रोका। इसे लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी और हाथापाई हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इससे पहले धरना हटाने की कार्रवाई के दौरान उनके टेंट और कुर्सियां भी तोड़ी गई थीं। कांग्रेस नेता विजय प्रताप ने भी लोगों से एकजुट होकर आंदोलन की अगली रणनीति तय करने की अपील की। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता दीपक चौधरी और समाजसेवी वरुण श्योकंद सहित अन्य लोग भी शामिल हुए।
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महापंचायत में आंदोलन तेज करने और कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला
गांव भांखरी में प्रस्तावित कूड़ा निस्तारण केंद्र के विरोध में रविवार को भांखरी गांव के सरकारी स्कूल में 36 बिरादरी की महापंचायत हुई। इसमें आसपास के गांवों और सोसाइटियों से दो हजार से अधिक लोग शामिल हुए। महापंचायत में भांखरी, नवादा, सैनिक कॉलोनी, बड़खल, पाली, अनखीर, फतेहपुर चंदीला, मेवला और अनंगपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने भाग लिया। दिल्ली पुलिस सोसायटी, कॉमन पीपल वेलफेयर समिति और अचीवर समिति के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। महापंचायत में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने रिहायशी क्षेत्र के बीच डंपिंग यार्ड बनाने और अरावली में कूड़ा डालने के विरोध में कानूनी लड़ाई लड़ने का भी फैसला लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि रिहायशी इलाके के बीच डंपिंग यार्ड किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासन ने मांगा एक दिन का समय
महापंचायत में आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए एक कमेटी गठित की गई। इसकी अध्यक्षता पूर्व मेयर अतर सिंह करेंगे। पंचायत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने डंपिंग यार्ड स्थल तक पैदल विरोध मार्च निकाला। स्थिति को देखते हुए मौके पर पहुंचे ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने ग्रामीणों को शांत कराया। उन्होंने सरकार से वार्ता के लिए एक दिन का समय देने का आश्वासन दिया।
एनजीटी में दायर की याचिका
पर्यावरणविद् जितेंद्र भड़ाना ने प्रदूषण के मुद्दे पर कार्रवाई की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि मामले को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में याचिका दायर की गई है। वहीं, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले में दो दिन के भीतर हाईकोर्ट में केस दायर करने की तैयारी है। महापंचायत में स्थानीय पार्षद और विधायक की गैरमौजूदगी पर भी नाराजगी जताई गई। महापंचायत में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात का समय तय किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक दोनों पक्षों की बैठक नहीं हो जाती, तब तक डंपिंग यार्ड में कूड़ा नहीं डाला जाएगा।
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अरावली और भूजल को नुकसान की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि अरावली की संवेदनशील प्राकृतिक पट्टी में कूड़ा डालने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। कचरे से निकलने वाला दूषित पानी जमीन में रिसकर भूजल को प्रदूषित कर सकता है, जिससे आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में करीब 200 टन कूड़ा डाला गया। हालांकि, इस दावे और पर्यावरणीय प्रभावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों व संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट जरूरी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि कूड़ा डालने की प्रक्रिया बंद होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
24 घंटे में करीब 200 टन कूड़ा डालने का दावा फरीदाबाद। महापंचायत के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में पुलिस की निगरानी में अरावली क्षेत्र में करीब 200 टन कूड़ा डाला गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कूड़ा डालने का लगातार विरोध किया जा रहा है, इसके बावजूद भी कूड़ा लगातार डाला जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले में प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।