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बाढ़ प्रभावितों को मिल रहीं सभी सुविधाएं

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अपना आशियाना छोड़ सरकारी स्कूल में ली शरण
लतीफपुर गांव का हाल : प्रशासन ने संभावित बाढ़ से सुरक्षित करने को बनाया ठिकाना

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। यमुना खादर में नदी के बीच बसे लतीफपुर गांव के परिवारों की महिला और बच्चों को प्रशासन ने गांव अरुआ स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शरण दी है। स्कूल में शरणार्थियों के लिए चाय-नाश्ता, खाना, दवा इलाज का भी प्रबंध किया गया है। घरों से अलग हुई इन महिलाओं को परिवार के अन्य सदस्य, फसल और पशुओं की चिंता सता रही है। प्रशासनिक अमला इनकी सुरक्षा और सुविधा के इंतजाम में मुस्तैद दिखा।
उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित साहूपुरा खादर ग्राम पंचायत का गांव लतीफपुर यमुना नदी के बीच बसा हुआ है। इस टापू नुमा गांव में करीब तीस परिवारों के 150 से अधिक सदस्य रहते हैं। इन परिवारों का मुख्य कारोबार कृषि और पशुपालन ही है। हाल ही में हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में छोड़े गए पांच लाख क्यूसेक पानी का असर सबसे पहले तलीफपुर गांव पर ही पड़ा। पानी चढ़ने के साथ नदी की डूब क्षेत्र में स्थित खेती नदी में समा गई। प्रशासन ने आनन फानन गांव में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के प्रबंध किए।
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रात में पानी घुटनों तक आ गया था, छोटे बच्चों के तो गले तक पानी था, हर समय जान माल के नुकसान का डर सता रहा था, रात में ही पुलिस वाले स्टीमर लेकर पहुंचे और हम लोगों को बचाया। यहां खाने पीने से लेकर हर तरह की सुविधा है लेकिन गांव की चिंता सता रही है।
- माया देवी, निवासिनी लतीफपुर

हम लोग तो आ गए अभी गांव में हमारे आदमी, बच्चे और ढोर डंगर हैं। गृहस्थी भी वहीं पड़ी है। जान तो बच जाएगी लेकिन पानी में जो गृहस्थी डूब जाएगी उसको दोबारा बनाना पड़ेगा।
- सबरा बाई

भाई यूं समझो कि अभी तक सौ कीला कपास, दो सौ कीला धान, इतनी ही ज्वार की फसल डूब कर बर्बाद हो गई। वो तो अच्छा हुआ कि ढोर डंगर लेकर हमारे आदमी यूपी की ओर निकल गए वरना मुश्किल हो जाता।
- ब्रह्माबाई

हम तो सुरक्षित हो गए लेकिन गृहस्थी लुट गई, पानी में हमारी झोपड़ी डूब गई, अनाज, कपड़े शायद ही बचें, पानी उतरने के बाद घर दोबारा बनाना पड़ेगा। प्रशासन की ओर से हमें कोई मदद नहीं मिलती, नेता सिर्फ वोट लेने आते हैं, आज तक लतीफपुर में कोई विकास कार्य नहीं किया, हर साल हमें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
- सुक्खा देवी

चाय, पूड़ी-सब्जी, पानी का इंतजाम
बाढ़ पीड़ितों के खान-पान का जिम्मा गांव के पटवारी ओम प्रकाश और शिक्षक लोकेश शर्मा को सौंपी गई है। अरुआ सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शरण लिए इन महिला और बच्चों को सुबह चाय पूड़ी का नाश्ता दिया गया, दोपहर में पूड़ी सब्जी दी गई। ओम प्रकाश ने बताया कि एसडीएम बल्लभगढ़ के निर्देश हैं कि खाने पीने में कमी नहीं होनी चाहिए।

चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध
स्कूल में एक कमरे को अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में तब्दील किया गया है। यहां कौराली सामुदायिक केंद्र की टीम 24 घंटे सेवा में लगाई गई है। सोमवार रात लतीफपुर से लाई गईं ब्रह्मा बाई की सांसें फूलने लगी। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. प्रियंका ने इंजेक्शन लगाकर उनकी तबीयत दुरुस्त की। डॉ. संगीता ने बताया कि तीन डॉक्टरों सहित दस लोगों का स्टाफ यहां मौजूद है। बुखार, जुखाम, एलर्जी, डायरिया, चोट आदि सामान्य बीमारियां का इलाज उपलब्ध है, जरूरत पड़ने पर मरीज को यही आईवी फ्ल्यूइड लगाने की भी सुविधा है। 24 घंटे में 19 लोगों का इलाज किया गया। इमरजेंसी की स्थिति में बीके सिविल अस्पताल ले जाने के लिए दो एंबुलेंस भी तैनात हैं।

निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
स्कूल में शरण लिए महिला बच्चों की सुरक्षा के लिए दो पुलिस कर्मियों की चौबीस घंटे तैनाती की गई है। एसएचओ छांयसा कुलदीप दहिया ने बताया कि इन पुलिसकर्मियों के अलावा वह खुद दिन-रात में कई बार सुरक्षा का निरीक्षण करते हैं। फिलहाल यमुना ठहराव पर है फिर भी पानी चढ़ने की स्थिति में गांव से लोगों को निकालने के लिए स्टीमर का इंतजाम किया गया है।
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नदी के बीच कुआं है गांव वालों के खतरे का निशान
साहूपुरा खादर गांव के बिजेंदर शर्मा ने गांव और लतीफपुर के बीच बह रही यमुना नदी के बीच स्थित कुएं की ओर इशारा करते हुए बताया कि हम लोग बाढ़ की पहचान इसी कुएं से करते हैं। यदि यह कुआं पूरी तरह डूब जाता है तो लतीफपुर गांव की फसलें पूरी तरह डूब जाती है। अभी कुआं करीब पांच फुट बाहर है इसका अर्थ है कि लतीफपुर गांव के बाहरी इलाके की फसल जलमग्र हुई है। शिक्षक लोकेश शर्मा ने बताया कि लतीफपुर के पुरुष अभी गांव में ही रहना चाहते हैं। यह लोग अपने घर-गृहस्थी, खेती और पशुओं की सुरक्षा के लिए वहीं रुके हुए हैं। गांव में कुछ ऊंची जगहें हैं जहां अभी पानी नहीं पहुंचा है यह पुरुष वहीं रुके हुए हैं और अपने घरों में आ जा रहे हैं।
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