पटाखों के धुएं ने बिगाड़ी हवा
फरीदाबाद। दिवाली और गोवर्धन पूजा की रात जलाए गए पटाखों के कारण औद्योगिक नगर शुक्रवार को देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 469 के बेहद खतरनाक स्तर तक पहुुंच गया। प्रदूषण पर नजर रखने वाली निजी वेबसाइट के मुताबिक, वायु गुणवत्ता सूचकांक 529 के बेहद खराब स्तर पर रहा। सांस के लिए खतरनाक प्रदूषक पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की मात्रा दिन में कई घंटों तक 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सर्वोच्च दर पर बनी रही। हवा में प्रदूषकों के घुले रहने से स्मॉग छाया।
ग्रीन पटाखों के न होने पर दिवाली के आसपास औद्योगिक नगरी में पारंपरिक पटाखों की चोरी छिपे जमकर बिक्री हुई। बुधवार और बृहस्पतिवार की रात जमकर आतिशबाजी की गई। इसका नतीजा वायु प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर के रूप में सामने आया। वातावरण में धुआं और अति सूक्ष्म कणों के छा जाने से वायु गुणवत्ता बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कें केंद्र पर प्रदूषक पीएम 2.5 की मात्रा शुक्रवार रात 12 बजे अधिकतम यानी 500 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर मापी गई। यह दर शुक्रवार सुबह चार बजे तक बनी रही इसके बाद पीएम 2.5 की मात्रा में कुछ देर के लिए कमी हुई। सुबह सात बजे पीएम 2.5 की मात्रा 417 माइक्रोग्राम हुई। सूरज निकलने के साथ ही पीएम 2.5 की मात्रा फिर से बढ़ने लगी। दोपहर 12 बजे इसकी मात्रा फिर अधिकतम 500 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के उच्चतम बिंदु पर पहुंच गई। हल्की हवा और धूप में तेजी होने के कारण दोपहर बाद पीएम 2.5 घट कर 344 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर की दर पर पहुंचा लेकिन वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार नहीं हुआ। नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा भी हवा में सामान्य से लगभग दोगुनी तक पहुंचीं। सल्फर डाई ऑक्साइड और ओजोन प्रदूषक सामान्य बने रहे। पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता पवन भारद्वाज कहते हैं कि फरीदाबाद में पीएम 10 की मात्रा नहीं मापी जाती, यदि जांच हो तो यह शहर देश के सर्वाधिक टॉप पांच शहरों में साल भर बना रहेगा क्योंकि यहां पर पत्थर-मिट्टी-रेत खनन और निर्माण कार्य अंधाधुंध तरीके से चल रहे हैं, यही पीएम 10 के सबसे बड़े स्त्रोत हैं। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विजय चौधरी ने बताया कि पछुआ हवाएं चलने से प्रदूषण का स्तर घटने की उम्मीद है।
स्वस्थ व्यक्तियों ने भी महसूस की परेशानी
वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने का असर बीमार लोगों के साथ स्वस्थ व्यक्तियों पर भी देखने को मिला। लोगों ने बेचैनी, दिल धड़कने, सिर दर्द, भारीपन, आंखों में जलन दर्द, सूखापन जैसी दिक्कत महसूस कीं। दिल और सांस के मरीजों को ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सांस के मरीज मास्क लगाकर या मुंह ढक कर खुद का बचाव करते रहे तो दिल के मरीजों ने भी खुले में नहीं निकलने, मास्क लगाने और उचित दवाएं लेने में कोई कोताही नहीं बरती।
शहर में सड़कों पर करवाया गया छिड़काव
बेहद खराब वायु गुणवत्ता के मद्देनजर जिला और नगर निगम प्रशासन ने शुक्रवार को सुबह से ही शहर की प्रमुख सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया। छिड़काव के कारण जमीन के आस पास हवा में तैर रही धूल, सूक्ष्म आदि बैठ गए। शुक्रवार को एनआईटी एक, दो, तीन, चार और पांच की पेरिफेरल रोड, बीके केसी रोड, बीके हार्डवेयर रोड सहित सभी प्रमुख सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाया गया।