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नगर निगम को दीमक की तरह चाट रहे अधिकारी: पार्षद

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‘स्वीकृत काम रुके हुए हैं, बिना स्वीकृत गति से हो रहे हैं’
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। पार्षदों को 2017 में दो करोड़ रुपये मिले थे, उसमें से किसी का भी बीस लाख रुपये का काम नहीं हुआ। अधिकारी अपनी मनमानी से पिछले साल 67 करोड़ रुपये के काम स्वीकृत के जरिए करवा रहे हैं। पार्षद फंड की मद में पैसा नहीं है और अधिकारी जनरल फंड में धन उड़ा रहे हैं। पार्षद सुरेंद्र अग्रवाल ने सदन में निगम अधिकारियों पर यह आरोप लगाया तो अन्य पार्षदों ने भी हामी भरी।
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सुरेंद्र अग्रवाल ने जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों ने वार्ड वार सेंक्शन और जनरल फंड सेंक्शन में 50 से 100 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। पार्षदों के सेंक्शन काम रुके हुए हैं जबकि बिना सेंक्शन के काम हो रहे हैं। कहा कि अधिकारी चुने हुए जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनते और ठेकेदारों से मिलीभगत कर करोड़ों के काम करवाते हैं। क्षेत्र में कहां विकास कार्य कराए जाने हैं यह पार्षद बेहतर ढंग से समझते हैं लेकिन अधिकारी ठेकेदारों से मिलीभगत कर मनमानी जगह काम करवाते हैं। उन्होंने पिछले दो साल में पार्षद फंड और जनरल फंड से कराए गए कार्यों का वार्डवार और फंडवार ब्योरा मांगते हुए कहा कि जनरल फंड में करोड़ों खर्च हुए पार्षद फंड में बीस लाख के काम नहीं हुए। वरिष्ठ उपमहापौर देवेंद्र चौधरी ने कहा कि सेंटर फाइनेंस कमीशन और स्टेट फाइनेंस कमीशन से मिलने वाले 100 करोड़ में से कम से कम पचास फीसदी धन पार्षदों को दिया जाए, इसकी मांग सरकार से की जा रही है। निगमायुक्त अनीता यादव ने भी सीएफसी-एसएफसी का 50 फीसद धन पार्षदों को दिए जाने का आश्वासन दिया।
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